- महिमा वाचक सुरभि दीदी की श्रीकृष्ण भक्ति संध्या में कृष्णमय हुआ गाज़ियाबाद
- राष्ट्रधर्म की स्थापना के लिए कष्टमय रहा श्रीकृष्ण का जीवन






गाज़ियाबाद: हिंदी भवन में डॉ. पवन सिन्हा गुरुजी के सान्निध्य में पावन चिन्तन धारा आश्रम, मुरादनगर और लोक कल्याण सेवा संस्थान की ओर से श्रीकृष्ण भक्ति संध्या का आयोजन किया गया. इस अवसर पर पावन चिंतन धारा आश्रम के संस्थापक परम पूज्य डॉ. पवन सिन्हा गुरुजी ने कृष्ण भक्तों को सम्बोधित करते हुए पाखंड से दूर रहने को कहा और धर्म का सही स्वरूप समझने को कहा। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए बताया कि जो अपने अंदर के ईश्वर को पूज नहीं सकता, वह बाहर भी ईश्वर को पूज नहीं सकता। खुद परिवर्तित हुए बिना आप दूसरों को परिवर्तित नही कर सकते। इसलिए अपने पंचविकार दूर करें। नर सेवा के बिना नारायण की सेवा नहीं हो सकती। ऋषिकुलशाला के बच्चों की शिक्षा, नारायण सेवा ही है। परम पूज्य श्री गुरुजी ने अपने वक्तव्य में विशेष रूप से ऋषिकुल की महत्वपूर्ण उपलब्धि का उल्लेख करते हुए बताया कि 150 परिवार वाले सिवान मुसहर टोला की ऋषिकुलशाला की एक बच्ची ने प्रथम श्रेणी में कक्षा दस की परीक्षा उत्तीर्ण की है। श्री गुरुजी ने सभी कृष्ण भक्तों को कृष्णमय होने के लिए आह्वान किया।
श्रीगुरु माँ डॉ. कविता अस्थाना ने सभागार में उपस्थित कृष्ण भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि आश्रम का लक्ष्य धर्म और राष्ट्र की स्थापना करना है । यह कृष्ण भक्ति संध्या भी उसी का एक हिस्सा है ताकि युवाओं के द्वारा योगेश्वर श्री कृष्ण के सही स्वरूप एवं धर्म का प्रचार-प्रसार हो सके। We are into Spirituality not by chance or escapism but by choice. समाज का कार्य समाज की भागीदारी से ही होता है इसलिए समाज के अलग-अलग शहरों में भक्ति संध्या के योजन और ऋषिकुलशाला के अभावग्रस्त बच्चों की शिक्षा, संस्कार, उच्च शिक्षा और प्रतिभा को निखारने के लिए सहयोग हेतु आह्वान किया ।
व्यासपीठ पर शोभायमान महिमा वाचक सुरभि दीदी ने श्रीकृष्ण जी के जन्म से लेकर मृत्यु तक के सभी सूक्ष्म से सूक्ष्म रहस्यों को उजागर किया। गुरु वंदना और गणेश स्तुति से भक्ति संध्या का शुभारंभ करते हुए श्री कृष्ण के जीवन के प्रसंगों के माध्यम से सच्चे भक्त, सच्ची भक्ति की व्याख्या की। महिमा वाचक सुरभि दीदी ने बताया कि अगर आप भगवान् को केवल मूर्ति मानते हैं तो भगवान् भी मूरत ही बना रहता है। परंतु जिस दिन आप उस मूर्ति के अंदर के अंश को खुद को सौंपते हैं, तब वह आपको थामता ही नहीं है बल्कि आपके आप में खुद को जीने लगता है । भक्ति तो प्रेम की वह पराकाष्ठा है जहाँ भक्त और भगवान में कोई अंतर नहीं रह जाता।
श्रीकृष्ण के जन्म की कथा के बारे में बताते हुए आदरणीया सुरभि दीदी ने सभी भक्तों को इस पीड़ा का भी अनुभव कराया कि श्रीकृष्णजी, जो स्वयं भगवान् विष्णु जी के अवतार हैं, उन्हें भी धरती पर धर्म की स्थापना के लिए अत्यंत विकट परिस्थितियों में जन्म लेना पड़ा। श्री कृष्ण का कष्ट और पीड़ा देखिए कि जब हमारे ईश्वर ने इस धरती पर जन्म लिया तो न तो माँ दूध मिला और न ही माँ की गोद मिली. हम साधारण मनुष्य छोटी-छोटी बातों से घबरा जाते हैं। हमारे परमपूज्य श्री गुरुजी तो भक्ति में इतना विश्वास रखते हैं और कहते हैं कि तुम भक्ति करो और भक्ति के साथ अपना कर्म करो, तो जो तुम्हारे भाग्य में भी नहीं लिखा वो तुम्हें प्राप्त होगा लेकिन कर्म की श्रेष्ठता और भक्ति की पराकाष्ठता होनी चाहिए। भक्त का जीवन अनुशासित और स्वभाव बहुत सहज व सरल होना चाहिए। श्रीकृष्ण के जीवन का संदेश देता है कि सामाजिक उद्देश्य और धर्म से बड़ा कुछ भी नहीं होता. श्रीकृष्ण ने अपने राष्ट्र को स्वयं से ऊपर रखा। श्रीकृष्ण राष्ट्रधर्म की स्थापना करते हैं। जो कृष्ण के भक्त हैं उन्हें राष्ट्रभक्त होना होगा और राष्ट्र धर्म को मानना पड़ेगा। यह राष्ट्र विश्व गुरु था इसे पुनः विश्व गुरु बनाना पड़ेगा। महाभारत के युद्ध का वर्णन करते हुए भक्ति संध्या में यह बताया गया कि कैसे श्रीकृष्ण ने बहुत बाण सहे। उनके वस्त्रों से रक्त बहता था, उनका कवच बिंध जाता था लेकिन स्वयं सारी पीड़ा सहते रहे, किसी को अपनी पीड़ा, कष्ट बताया भी नहीं.
वर्तमान समय में आजकल बच्चे, युवा जिन परेशानियों से गुज़र रहे हैं उनमें से एक गंभीर परेशानी है -डिप्रेशन. महाभारत के युद्ध में अर्जुन, जिन्हें श्रीकृष्ण ‘परमतप’ कहते थे, इतने विद्वान, इतने बलिष्ठ, इतने बड़े धनुर्धर थे, लेकिन भी वे डिप्रेशन में आ गए थे. श्रीकृष्ण ने डिप्रेशन से छुटकारा पाने का रास्ता उन्हें बताया. आदरणीया सुरभि दीदी ने कहा कि आपके भीतर भी स्वयं ईश्वर श्रीकृष्ण विराजमान हैं. उनसे लौ लगा लीजिए, डिप्रेशन भी दूर होगा और भाग्य भी उदय होगा. हर वक्त बहुत नकारात्मक सोचने से न तो भक्ति मिलती है और न ही भगवान् और न ही भाग्य। असफलता से बाहर आने के लिए, जप कीजिए और कर्मठता से अपना कार्य कीजिए।
हमें जो कुछ भी भाग्य से मिल गया है, उसे बनाए रखने के लिए हमेशा एक सूत्र याद रखिए, जो श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा था, योगक्षेमं वहाम्यहम् और फिर आप देखिए अप्राप्य की प्राप्ति भी आप कर सकते हैं। जब श्रीकृष्ण के जीवन में इतना दुःख था, हम तो साधारण मनुष्य हैं. भीष्म पितामाह और पांडवों के जीवन का दृष्टांत देते हुए बताया गया कि दुःख सभी के जीवन में आते-जाते रहते हैं और दुख के समय में हमें भक्ति करनी चाहिए। भक्ति से हमारी बुद्धि सकारात्मक रहती है, मुश्किल समय में भी मन प्रसन्न रहता है. भक्ति करते हैं तो भगवान हमें दु:खों से लड़ने का साहस देंगे और रास्ता भी सुझा देंगे।
श्रीकृष्ण के जीवन के अंतिम क्षणों में उनकी पीड़ा का मार्मिक वर्णन सुनकर सभी कृष्णभक्त अत्यंत भावुक हो गए. श्रीकृष्ण ने सोलह हज़ार स्त्रियों को सम्मान दिया, उन्हें संरक्षण दिया लेकिन अज्ञानियों ने उन्हें श्रीकृष्ण की रानियाँ बना दिया. बलदाऊ ने भी उन्हें अकेला छोड़ दिया. श्री कृष्ण ने सदा ही पांडवों के जीवन के सुख-दुख में साथ दिया लेकिन जब श्री कृष्ण के महाप्रस्थान का समय आया तब श्रीकृष्ण अकेले ही थे। अधिकतर ऐसा होता है कि साधु-संत आदि सभी महान विभूतियां अकेले ही रह जाते हैं। यदुवंशियों के दुर्व्यवहार के कारण ऋषि मुनियों ने जो श्राप दिया, गांधारी ने भी जो वंशहीन होने का जो श्राप दिया उसके कारण श्री कृष्ण का वंश समाप्त हो गया। श्रीकृष्ण ने प्रकृति या विधान के विपरीत कोई कार्य नहीं किया – ‘कृतांत मन्यथा नैच्छत् कर्तुम स जगत: प्रभु: अर्थात् यद्यपि भगवान श्रीकृष्ण सम्पूर्ण जगत के ईश्वर हैं तथापि यदुवंशियों पर आने वाले उस काल को उन्होंने पलटने की इच्छा नहीं की। श्रीकृष्ण का यह बहुत बड़ा संदश है। महिमा वाचक आदरणीय सुरभि दीदी आह्वान पर सभी कृष्ण भक्तों ने शपथ ली कि वे श्री कृष्ण के दिखाए मार्ग पर चलेंगे, पंच विकारों को दूर करेंगे और राष्ट्र के लिए कार्य करेंगे।
आश्रम की सुर साधक मंडली के सुर साधकों – डॉ. संजय अन्डूरकर , सुश्री ख्याति , करण मल्होत्रा और आस्तिक सिन्हा अस्थाना के मधुर भजनों से सारा सभागार कृष्णमय हो गया.
श्रीकृष्ण भक्ति संध्या के सुवसर पर मुख्य अतिथि सांसद अतुल गर्ग एवं भक्ति संध्या के आयोजक यजमान अनिल अग्रवाल साँवरियाँ , अनिल कुमार गर्ग, अरुण कुमार अग्रवाल , मनोज कुमार गोयल , लोकेश गोयल , देवेंद्र हितकरी , श्रीमती श्वेता गुप्ता , हिमाली अग्रवाल उपस्थित थे। साथ ही गाज़ियाबाद शहर की जानी-मानी हस्तियाँ संदीप सिंघल , प्रदीप चौहान, रवि कटारिया , संगीता शर्मा , योगेन्द्र सिंह , सीमा गोयल, आशु बिंदल, विभा रावत, विनीता अग्रवाल, डॉ अनिल अग्रवाल, राज कौशिक, भानु सिसोदिया , सुधीर अग्रवाल , पृथ्वी सिंह कसाना, शेखर, अमर दत्त शर्मा आदि की गरिमामय उपस्थित रही। अनिल साँवरिया ने सभी का धन्यवाद दिया। इस कृष्ण भक्ति संध्या में विभिन्न राज्यों, प्रदेशों से आए कृष्ण भक्तों ने भक्ति संध्या का आनंद लिया!

