बर्ड फ्लू से घबराए नहीं, बचाव के समुचित तरीके अपनाएं: डॉ. एसपी पाण्डेय

गाजियाबाद। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डाक्टर एसपी पांडेय ने बताया कि पशुओं में बर्ड फ्लू का प्रभाव आमतौर पर पक्षियों में देखा जाता है, खासकर मुर्गियों और अन्य घरेलू पक्षियों में। प्रवासी पक्षी साईबेरियन बर्ड इस बीमारी के कैरियर होते है। बर्ड फ्लू का वायरस मुर्गियों व अन्य पक्षियों में गंभीर बीमारी और मृत्यु का कारण बन सकता है। कुछ मामलों में, यह वायरस अन्य जानवरों जैसे बिल्लियों, बिल्ली प्रजाति के पशुओं कुत्तों, जंगली पशुओ को प्रभावित करता है। यह बीमारी मनुष्यों में भी फैल सकती है, खासकर जब वे संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क में आते हैं। यह बीमारी एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में नही फैलती है।
पशु पक्षियों में बर्ड फ्लू के लक्षण:

  1. पक्षियों में: –

-अचानक भारी संख्या में मौत

  • कलगी और पैरों में सूजन
  • कलगी और पैरों में रक्त स्राव व नीला पड़ जाना
  • नाक एवं आँख से पानी बहना
  • सर्दी जुकाम जैसे लक्षण
  • सांस लेने में तकलीफ
  • दस्त
  • अंडे देने की दर में कमी
  • पक्षियों का असामान्य व्यवहार, जैसे कि मुर्गियों का एक साथ बैठना और कम खाना खाना।
  1. अन्य जानवरों में: –
  • बुखार
  • खांसी और सांस लेने में कठिनाई
  • नाक और आंखों से तरल पदार्थ का रिसाव

पशुओं में बर्ड फ्लू से बचाव के उपाय:

  1. टीकाकरण: – पक्षियों को नियमित रूप से बीमारियों से बचाव के टीका लगवाएं।
  2. स्वच्छता:- पॉल्ट्री फार्म एवं पशुशालाओं और आसपास के क्षेत्र को साफ रखें।कीटनाशक, कीटाणुनाशक दवाईयों का छिड़काव करें।
  3. संक्रमित पक्षियों को अलग करें:- अगर किसी पक्षी में लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत अन्य पक्षियों से अलग कर दें।
  4. नियमित जांच: नियमित रूप से पशुओं की जांच करवाएं और किसी भी असामान्य लक्षण की सूचना तुरंत नजदीकी पशुचिकित्सालय के पशु चिकित्सक को दें। गाजियाबाद कंट्रोल रूम नोडल अधिकारी 7251953535 सह नोडल 8076286091एवं 9810705258 पर दे।
    निष्कर्ष:
    पशुओं में बर्ड फ्लू एक गंभीर बीमारी है जो न केवल पक्षियों बल्कि अन्य जानवरों और मनुष्यों के लिए भी खतरनाक हो सकती है। साफ सफाई, उचित सावधानियां और नियमित टीकाकरण इस बीमारी को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं
    बर्ड फ्लू संदेह की स्थिति में क्या करें
    -अचानक अप्रत्याशित मृत पक्षियों की सूचना तत्काल जिला स्तरीय बर्ड फ्लू कंट्रोल रूम के अतिरिक्त पशुपालन निदेशालय स्तर पर स्थापित कंट्रोल रूम के दूरभाष नम्बर 05222741991, 2741992 एवं टोल फ्री नंबर 18001804151 पर भी सूचित कर सकते है।।
  • अच्छी तरह पकाए गए कुक्कुट माँस या अण्डे आदि से बर्ड फ्लू नही फैलता है। इसलिए कुक्कुट या कुक्कुट उत्पाद को अच्छी तरह से पकाकर ही खाये।
    -पॉल्ट्री या पक्षियों के पालने के स्थान या फार्म के आसपास जैव सुरक्षा (बायोसिक्यॉरिटी) का पालन करते हुए साफ सफाई रखे। पॉल्ट्री फार्म को कीटाणुनाशक से सेनेटाईज करते रहे। किसी बाहरी व्यक्ति, पशु पक्षी को पॉल्ट्री फार्म में प्रवेश न करने दे।
    -पक्षियों को हैंडल करने के पश्चात एंटीसेप्टिक सोलुशन से हाथ अच्छी तरह से धोये।
    -बर्ड फ्लू से संक्रमित पक्षी के सम्पर्क में आने पर चिकित्सक की सलाह से दवा खाये।
    क्या न करें
    -मृत पक्षी को नंगे हाथ से छुए नही, शव परीक्षण न कराये।
    -अफवाहों पर ध्यान न दे।
  • जिन क्षेत्रों मे बर्ड फ्लू की सूचना प्राप्त हो, उसके आसपास न घूमे।
  • संक्रमिक पक्षियों के सीधे संपर्क में आने से बचे।
  • पॉल्ट्री, पॉल्ट्री उत्पाद को खुले वाहन में परिवहन न करें।
    मनुष्य में बर्ड फ्लू का प्रभाव
  • बर्ड फ्लू को ही एवियन इन्फ्लूएंजा भी कहा जाता है, कुछ मामलों में यह मनुष्यों पर भी प्रभाव डाल सकता है।
  • विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (हअऌड) एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन (हऌड) के अनुसार बीमारी का संक्रमण मनुष्य में बहुत अधिक नही है।
  • सभी जंगली एवं पालतू पशु पक्षियों में आपस में बीमारी का संक्रमण हो सकता है। मनुष्य में संक्रमण मुख्यत: जंगली एवं पालतू पक्षियों से होता है।
    -अभी तक बीमारी का संक्रमण मनुष्य से मनुष्य में नही देखा गया है।
    -गोवंश में बीमारी का संक्रमण हो सकता है। संक्रमित गोवंश में बुखार, सांस लेने में कठिनाई, दुग्ध उत्पादन में कमी, गाभिन पशुओं में गर्भपात के लक्षण प्रकट होते है।
  • वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य के निकट नेपाल देश मे वाईरस पॉजिटिव आया हैं जिस कारण से प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, वन विभाग एवं पशुपालन विभाग अलर्ट मोड पर हैं एवं आम व्यक्ति को जागरूक किया जा रहा है।
    बर्ड फ्लू बीमारी से प्रभावित मनुष्य में देखे गए लक्षण:
    -बुखार
  • खांसी
  • सांस लेने में तकलीफ
    -बीमारी घातक नही होती

बर्ड फ्लू से मनुष्य में बचाव के उपाय:
-साफ-सफाई: – खाने से पहले या पब्लिक प्लेसेज पर किसी भी चीज को छूने के बाद हाथों को साबुन और पानी से धोएं।

  • खाने की सावधानी – कच्चा या अधपका चिकन या अंडे न खाएं। पाश्चुरीकृत दूध और दही का सेवन करें।
  • सुरक्षात्मक कपड़े:- पक्षियों के आसपास काम करते समय दस्ताने, मास्क जैसे सुरक्षात्मक कपड़े पहनें।
    -मृत पक्षियों से दूरी: – मृत पक्षियों को न छुएं और उनकी सूचना बर्ड फ्लू कंट्रोल रूम को दें।
  • स्वस्थ आहार: – फल, सब्जियां और अन्य पौष्टिक आहार का सेवन करें जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं।
    उत्तर प्रदेश में बर्ड फ्लू की स्थिति: अभी बर्ड फ्लू के मामले सामने नही आए हैं।
    गाजियाबाद के सभी पॉल्ट्री फार्मों से सैम्पल कलेक्ट करने, पॉल्ट्री फॉर्म पर सेनेटाईजेशन की व्यवस्था करने, बायोसिक्यॉरिटी सुनिश्चित कराने, मृत पक्षियों का प्रॉपर विधि से डिस्पोजल कराने, बीमार पक्षियों को अलग रखकर चिकित्सा कराने के निर्देश दिए गए है।
    गोआश्रय स्थलों पर साफ सफाई रखने, बीमार पशुओं का समुचित चिकित्सा करने, मृत पशुओं का समुचित निस्तारण करने, कीटनाशक एवं

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