- 22 फ्लैट हुए थे प्रभावित, डीएम के निर्देश पर गठित की गई थी जांच समिति
गाजियाबाद। गौर ग्रीन एवेन्यू, इंदिरापुरम में दिनांक 29 अप्रैल 2026 को हुई अग्निकांड की घटना के संबंध में जिलाधिकारी गाजियाबाद के निर्देश पर गठित उच्चस्तरीय जांच समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है। समिति में सचिव, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को अध्यक्ष तथा अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), मुख्य अग्निशमन अधिकारी एवं सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा को सदस्य के रूप में नामित किया गया था। समिति द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण, सीसीटीवी फुटेज का परीक्षण, तकनीकी रिपोर्टों का अध्ययन तथा सोसाइटी निवासियों, आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों से विस्तृत वार्ता कर जांच संपन्न की गई। जांच समिति की प्रमुख बिंदुवार फाइंडिंग्स निम्नवत हैं —
आग टावर-डी के 9वें तल से प्रारंभ हुई, जिसने तेजी से ऊपरी मंजिलों को प्रभावित किया तथा लगभग 22 फ्लैट इसकी चपेट में आए। अग्निशमन विभाग द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए लगभग 17 फायर टेंडर, वाटर बाउजर, 2 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म एवं लगभग 70 अग्निशमन कर्मियों की सहायता से व्यापक रेस्क्यू अभियान चलाया गया, जिसमें किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। कई निवासियों द्वारा समिति को बताया गया कि घटना के समय फायर अलार्म प्रणाली प्रभावी रूप से कार्य नहीं कर रही थी तथा फायर सेफ्टी सिस्टम का रखरखाव संतोषजनक नहीं था। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि भवन के खुले क्षेत्रों एवं फायर ड्राइव-वे में स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण एवं अवरोध विकसित किए गए थे, जिसके कारण अग्निशमन वाहनों की पहुंच प्रभावित हुई तथा राहत एवं बचाव कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। समिति द्वारा स्वीकृत मानचित्र एवं स्थल का मिलान करने पर पाया गया कि टावर-डी के सामने विकसित ग्रीन एरिया, स्विमिंग पूल एवं क्लब हाउस क्षेत्र में बाउंड्री वॉल एवं अस्थायी संरचनाएं विकसित कर दी गई थीं। प्रथम दृष्टया यह प्रतीत हुआ कि इन अवरोधों के कारण फायर फाइटिंग आॅपरेशन प्रभावित हुआ। फ्लैट संख्या डी-943 में विद्युत सुरक्षा विभाग द्वारा जांच के दौरान विद्युत आपूर्ति एवं एमसीबी सामान्य स्थिति में पाई गई तथा प्रथम दृष्टया आग का कारण सीधे विद्युत शॉर्ट सर्किट से संबंधित प्रतीत नहीं हुआ। हालांकि घटना के वास्तविक कारणों का स्पष्ट निर्धारण नहीं हो सका। मुख्य अग्निशमन अधिकारी की रिपोर्ट में यह भी उल्लेखित किया गया कि भवन में स्थापित अग्निशमन सुरक्षा प्रणाली के रखरखाव, प्रशिक्षित फायर सेफ्टी स्टाफ एवं संबंधित एजेंसियों के विवरण उपलब्ध नहीं कराए गए। समिति द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों एवं सीसीटीवी फुटेज के आधार पर किसी प्रकार की साजिश अथवा जानबूझकर आग लगाए जाने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं पाया गया। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि आग लगने के वास्तविक कारणों का अंतिम रूप से निर्धारण नहीं हो सका है। समिति ने इस संबंध में स्थानीय पुलिस एवं संबंधित तकनीकी एजेंसियों द्वारा विस्तृत जांच कराए जाने की संस्तुति की है।
जांच समिति द्वारा दिए गए प्रमुख सुझाव
सभी समूह आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों में स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किसी भी प्रकार के अतिरिक्त निर्माण एवं अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए।
फायर ड्राइव-वे, ओपन एरिया एवं अग्निशमन वाहनों के आवागमन मार्ग को पूर्णत: अवरोधमुक्त रखा जाए।
सभी सोसाइटियों में फायर सेफ्टी सिस्टम का नियमित निरीक्षण एवं रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
सुरक्षा संबंधी शिकायतों पर संबंधित डेवलपर, आरडब्ल्यूए अथवा एओए द्वारा तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रत्येक समूह आवासीय एवं व्यावसायिक परिसर में प्रशिक्षित फायर सेफ्टी स्टाफ की उपलब्धता एवं आपातकालीन रिस्पॉन्स व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।
अग्निशमन उपकरणों, फायर अलार्म एवं हाइड्रेंट सिस्टम को सदैव कार्यशील स्थिति में रखा जाए तथा समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाए।

