- मान्यवर कांशीराम के मिशन को भूल चुकी है बसपा
- मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा, संगठन को मजबूत करने का करुंगा काम
गाजियाबाद, (कृष्ण त्यागी)। यूपी विधानसभा चुनाव का बिगुल कभी भी बज सकता है। ऐसे में सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर चुकी हैं। इन सबके बीच मान्यवर कांशीराम के अधूरे मिशन को पूरा करने के लिए जी जान लड़ने वाली आजाद समाज पार्टी भी पूरे दमखम के साथ चुनावी अखाड़े में उतरने के लिए तैयार है। उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर आजाद समाज पार्टी राष्ट्रीय की कोर कमेटी के सदस्य और उत्तर प्रदेश में पार्टी के महासचिव निजाम चौधरी से इस संबंध में विस्तृत रूप से बातचीत की गई। उन्होंने बातचीत के दौरान दावा किया के आने वाले विधानसभा चुनाव के परिणाम चाहें जो हों लेकिन आजाद समाज पार्टी सरकार के गठन में किंग मेकर के रूप में रहेगी। उन्होंने बसपा पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी, मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों/ मिशन को भूल गई है। अब वह धन कमाने वाली पार्टी बनकर रह गई है, इसी के चलते बसपा को टिकट बिक्री वाली पार्टी भी कहा जाने लगा है। यही वजह के उत्तर प्रदेश में सरकार बनाकर मुख्यमंत्री रहने वाले बसपा प्रमुख मायावती का उत्तर प्रदेश में सूपड़ा साफ हो चुका है। जनता ने बसपा को पूरी तरह नकार दिया है। निजाम चौधरी ने कहा कि मान्यवर कांशीराम का कहना था जितनी जिनकी हिस्सेदारी, उतनी उसकी भागीदारी, लेकिन बसपा ने इस नारे को ही बदल कर रख दिया। अब उनका नारा है, जिसकी जितनी थैली भारी, उतनी उसकी हिस्सेदारी, और बहुजन के स्थान पर बहन जी ने सर्वजन कर दिया है। इसी कारण से प्रदेश की जनता ने खासकर बहुजन ने उनको नकार दिया है और वह अब पूरी उम्मीद के साथ आजाद समाज पार्टी की तरफ आशा भरी नजर से देख रही है। यही नहीं आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद जहां कहीं भी मजलूमों पर अत्याचार होता देखते हैं वह वहां पहुंचकर उनकी बात को पुरजोर तरीके से उठाने का काम करते हैं, चाहे संसद हो या अन्य जगह, वे मजलूमों की आवाज को दबने नहीं देते हैं। भाजपा शासन काल में हो रहे अत्याचार को रोकने का काम वे कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा हिंदू-मुस्लिम कार्ड खेलकर हर बार सत्ता में आ जाती है लेकिन अब भारत की जनता खास कर उत्तर प्रदेश की जनता भाजपा के इस कार्ड को अच्छी तरह से समझ चुकी है, और अब वह सपा, बसपा, भाजपा के स्थान पर आजाद समाज पार्टी की तरफ उम्मीद भरी नजर से देख रही है, क्योंकि भाजपा मंदिर, मस्जिद, मदरसा का कार्ड खेलती है और मदरसा, मस्जिद आदि को टारगेट करती है जो किसी भी तरह सही नहीं है। भारत की आजादी में सभी, हिंदू-मुस्लिम का बराबर सहयोग रहा है। इसलिए भाजपा को हिंदू, मुस्लिम कार्ड नहीं खेलना चाहिए। इसका ताजा उदाहरण संभल, बिजनौर, सहारनपुर में मस्जिद गिराई गई जो भाजपा की मुसलमानों के प्रति नीति को स्पष्ट करता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा शासन काल में होने वाली पुलिस मुठभेड़ के दौरान मुस्लिम समाज के ज्यादा लोग घायल व मरे हैं, मुसलमानों का उत्पीड़न तेजी से बढ़ा है। उन्होंने सपा को भी घेरा और कहा कि समाजवादी पार्टी के कार्ड को भी अच्छी तरह से जनता समझ चुकी है क्योंकि सपा मुसलमानों को सिर्फ अपना वोट बैंक मानती है, इसी कारण से प्रदेश में सपा की सरकार आने वाली नहीं है, अखिलेश का सपना, सपना ही रह जाएगा।
उन्होंने बताया कि बसपा उनके साथ गठबंधन कर चुनाव नहीं लड़ना चाहती, वह अकेले ही चुनाव लड़ना चाहती है, जबकि वह चाहते हैं कि अगर मिलकर चुनाव लड़ेंगे तो प्रदेश में बेहतर नतीजे सामने आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बसपा का उनके साथ गठबंधन न करने का एक बड़ा कारण यह है कि अगर उनके साथ बसपा का गठबंधन होता है तो बसपा टिकट नहीं बेच पाएगी। निजाम चौधरी ने सीधे तौर पर कहा कि बहुजन समाज पार्टी यदि आजाद समाज पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करती है तो उसको यूपी की सत्ता प्राप्त नहीं होगी चाहे वह सपा हो, बसपा या कोई अन्य दल। उन्होंने यह भी कहा कि आजाद समाज पार्टी सत्ता में आती है तो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, विद्यालय प्रमुख मुद्दा रहेंगे। जबकि भाजपा इससे काफी दूर है। उन्होंने कहा कि भूखा पेट हमेशा बगावत ही करता है और इस समय यही कुछ हो रहा है बेरोजगारों के साथ नाइंसाफी तथा अगर वह अपने हक की बात करते हैं तो उन पर लाठी बरसाई जाती है या फिर उनको जेल में डाला जाता है जो किसी भी तरह से देश हित तथा युवा हित में नहीं है
निजाम चौधरी ने एक सवाल के जवाब में यह भी बताया कि मुरादनगर में इस समय 14000 की संख्या में मजदूर बाहर के हैं जो करीब जहां की 300 से 400 फैक्ट्रीयों में कार्य करते हैं इनमें बिहार, बलिया, देवरिया, रायबरेली आदि पूर्वांचल के रहने वाले हैं, साथ ही उन्होंने बताया कि यहां की फैक्ट्रियों में लेबर एक्ट लागू नहीं है, जिस कारण से मजदूरों को पीएफ, बोनस, वर्दी आदि उपलब्ध नहीं कराई जाती है। इसके अलावा फैक्ट्री में हाजिरी रजिस्टर उपलब्ध नहीं है, जिस कारण वहां कार्य करने वाले मजदूरों का रिकॉर्ड उद्योग विभाग में नहीं है। इस बात को उन्होंने कई बार उठाया , लेकिन श्रम हित की बात करने वाला विभाग इस ओर से उपेक्षित रवैया अपना रहा है, जो कि किसी भी तरह सही नहीं है। वे मुरादनगर मजदूर संघ नाम से मजदूरों की आवाज उठाते हैं और उनको न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह संघर्षरत हैं।

