पशुओं से मनुष्य में फैलने वाली गंभीर बीमारी को लेकर गांव-गांव पशु पालकों को किया जा रहा है जागरुक

  • गाजियाबाद के 74 गांवों में जाएंगी पशु चिकित्सा विभाग की टीमें

गाजियाबाद। पशुओं से मनुष्य में फैलने वाली बीमारी जापानी इंसेफेलाइटिस एवं लेप्टोस्पाइरोसिस बीमारी से बचाव हेतु पशुपालकों को 30 अप्रैल 2026 तक अभियान चलाकर जनपद गाजियाबाद के 74 ग्रामों के 219 सुकर पालक परिवारों को जागरूक किया जा रहा है। मुख्यपशुचिकित्सा अधिकारी गाजियाबाद डॉ. एसपी पाण्डेय ने बताया कि यह अभियान एक अप्रैल से शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि सुअरों से मनुष्य के बच्चों को जापानी इंसेफेलाइटिस बीमारी फैलती है। पशुओं के पेशाब से लेप्टोस्पाईरोसिस बीमारी मनुष्य में फैलती है। साफ सफाई एवं बचाव के तरीके अपनाकर संचारी रोगों से बचे। इस योजना अंतर्गत 75 ग्रामों के 218 सूकर पालकों के घर पहुंच कर 3075 सूकरों को लाभान्वित करने का पशुपालन विभाग प्रयासरत है।

क्या होता है जापानी इंसेफेलाइटिस: इस बीमारी को फैलाने में मच्छर वेक्टर का काम करते हैं। इस बिमारी को दिमागी बुखार भी कहते हैं। इसलिए बचाव के लिए सभी सुअर पालक सुअरों को आबादी से दूर पाले। साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। रात को सूकरों को मच्छरदानी में जरूर रखें। खुद भी मच्छरदानी में सोए। छोटे बच्चों को विशेषकर मच्छरदानी में सुलाएं अन्यथा बीमारी एक बार हो जाने पर ठीक करना बहुत कठिन होता है। दिमागी बुखार यह एक जानलेवा बीमारी है जो बच्चों को होती है।

क्या होता है लेप्टोस्पाईरोसिस: इसी प्रकार कुत्ते, बिल्ली घोड़ा, गधा चूहा आदि के पिसाब के सम्पर्क में आने पर लेप्टोस्पाईरोसिस बीमारी मनुष्य में हो जाती है। पशुपालन विभाग गाजियाबाद द्वारा संचारी रोग अभियान (1 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक) अंतर्गत आम पशुपालक को बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साफ सफाई, मच्छर दानी का प्रयोग और पशुओं के सम्पर्क में आने के बाद हाथ को अच्छी तरह से साफ करने से संचारी रोगों से बच सकते हैं।

संचारी रोग क्या है: संचारी रोग वे रोग हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं। ये रोग विभिन्न कारणों से फैल सकते हैं, जैसे कि संचारी रोग के कारण वायरस जैसे कि इन्फ्लूएंजा, एचआईवी, हेपेटाइटिस आदि। बैक्टीरिया जैसे कि ट्यूबरकुलोसिस, न्यूमोनिया आदि। फंगस जैसे कि रिंगवर्म, कैंडिडायसिस आदि। परजीवी जैसे कि मलेरिया, फिलेरियासिस आदि।

संचारी रोग के ये होते हैं लक्षण: अधिकांश संचारी रोगों में बुखार एक आम लक्षण है। सिरदर्द, थकान और कमजोरी भी संचारी रोगों के आम लक्षण हैं। खांसी, जुकाम और सांस लेने में कठिनाई भी संचारी रोगों के लक्षण हो सकते हैं। कुछ संचारी रोगों में त्वचा पर चकत्ते या दाने हो सकते हैं।

संचारी रोगों की ये है रोकथाम: टीकाकरण संचारी रोगों से बचाव का एक प्रभावी तरीका है। व्यक्तिगत स्वच्छता और सार्वजनिक स्वच्छता संचारी रोगों को रोकने में मदद करती है। संचारी रोगों के वाहकों जैसे कि मच्छरों, मकड़ियों आदि का नियंत्रण करना आवश्यक है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से संचारी रोगों को रोकने में मदद मिलती है।

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