आईटीएस फिजियोथैरेपी कॉलेज में बाल चिकित्सा फिजियोथेरेपी पर ज्ञानवर्धक सत्र

गाजियाबाद। आईटीएस फिजियोथैरेपी कॉलेज में बाल चिकित्सा में फिजियोथेरेपी की भूमिका विषय पर एक अत्यंत ज्ञानवर्धक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आईटीएस – दी एजुकेशन ग्रुप के वाईस चेयरमैन अर्पित चडढा एवं मुख्य अतिथि डॉ. आरजू बाला, संस्थापक एवं निदेशक टिकल्स चाइल्ड थेरेपी सेंटर, नोएडा के द्वारा हुआ। उन्होंने अपने प्रेरणादायक संबोधन में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन न केवल सैद्धांतिक ज्ञान को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि विद्यार्थियों को व्यवहारिक समझ, रोगी प्रबंधन एवं चिकित्सकीय दृष्टिकोण विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।ं
अपने विस्तृत व्याख्यान में डॉक्टर आरजू बाला ने बाल चिकित्सा के क्षेत्र में फिजियोथेरेपी के महत्व को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने विभिन्न बाल विकास सम्बंधी विकारों जैसे आॅटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, ध्यानभावक अतिसक्रियता विकार तथा डाउन सिंड्रोम से ग्रसित बच्चों के उपचार में फिजियोथेरेपी की भूमिका को विस्तार से समझाया। उन्होंने विशेष रूप से प्रारंभिक पहचान एवं शीघ्र हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि समय पर उपचार प्रारंभ करने से बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
डॉ. आरजू वाला बाल विकास चिकित्सा के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का समृद्ध अनुभव रखती हैं उन्होंने न्यूरो विज्ञान में परास्नातक उपाधि प्राप्त की है तथा बच्चों के उपचार हेतु विभिन्न उन्नत तकनीको में प्रशिक्षित है। वे विशेष रूप से सेरेब्रल पाल्सी, आॅटिज्म, डाउन सिंड्रोम एवं अन्य चिकित्सात्मक विकारों से ग्रसित बच्चों के उपचार में कार्यरत हैं और बहु-विषयक दल के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु निरंतर प्रयासरत है।
इस व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को बाल चिकित्सा फिजियोथेरेपी के विविध आयामों, नवीन उपचार पद्धतियों तथा रोगी प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं की गहन जानकारी हुई। यह सत्र विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक एवं उपयोगी सिद्ध हुआ, जिससे उनके ज्ञान एवं कौशल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। सभी विद्यार्थियों ने आई0टी0एस – दी एजुकेशन ग्रुप के माननीय वाईस चेयरमैन अर्पित चड्ढा के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। जिनके मार्गदर्शन एवं सहयोग से उन्हें इस प्रकार के ज्ञानवर्धक अवसर निरंतर प्राप्त होते हैं।

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