गाजियाबाद। स्मार्टफोन, टीवी और फास्ट फूड के इस आधुनिक दौर में जहाँ बच्चे शारीरिक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं, वहीं गाजियाबाद के कुछ जांबाज खिलाड़ियों ने अनुशासन और आत्मरक्षा Self-Defense की अनूठी मिसाल पेश की है। नीति खंड-2 में स्थित इंदिरापुरम कराटे स्कूल में आयोजित ‘कराटे बेल्ट टेस्ट’ में बच्चों का हुनर देखकर हर कोई दंग रह गया। इस परीक्षा में 4 वर्ष के मासूमों से लेकर 18 वर्ष से अधिक आयु के कुल 25 जांबाज खिलाड़ियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में इंदिरापुरम कराटे स्कूल के अध्यक्ष एवं मुख्य कोच पुष्पेन्द्र सिंह रावत ने सभी सफल खिलाड़ियों को सर्टिफिकेट और बेल्ट प्रदान करके उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान मौजूद अभिभावकों ने माना कि आज के समय में बच्चों को स्क्रीन मोबाइल फोन और टेलीविजन से दूर रखने और उनके शारीरिक व मानसिक विकास के लिए कराटे सबसे बेहतरीन माध्यम है।
कोच पुष्पेन्द्र सिंह रावत ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा: “आज हमारे बच्चों को फास्ट फूड से ज्यादा ‘फिजिकल एक्टिविटी’ की और मोबाइल-टीव्ही से ज्यादा ‘मैदान’ की जरूरत है। कराटे केवल आत्मरक्षा नहीं सिखाता, बल्कि बच्चों का स्क्रीन एडिक्शन छुड़ाकर उनमें गजब का फोकस और अनुशासन पैदा करता है। अपने बच्चों को गैजेट्स की जगह खेल का तोहफा दें।”
कड़ी परीक्षा के बाद अपग्रेड हुई बेल्ट
अंतर्राष्ट्रीय कराटे जज एवं रेफरी नैना रावत की देखरेख में खिलाड़ियों की कड़ी परीक्षा ली गई। इसमें ओरल टेस्ट, कीहोन, काता, कुमिते (फाइट) और प्रैक्टिकल परफॉर्मेंस का बारीकी से मूल्यांकन किया गया। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों की बेल्ट अपग्रेड की गई।
इन्हें मिला कामयाबी का तमगा:
येलो बेल्ट: वरुण नागर और अनय शुक्ला।
ऑरेंज बेल्ट: शिवन्या गुसाईं, तनुष माथुर, अश्विक अग्रवाल, इवान शर्मा, मायरा जोशी, मोनिथ मजूमदार, देवांशी जैन और मायरा यादव।
ग्रीन-1 बेल्ट: अमायरा गोयंका, गायत्री भान।
ग्रीन-2 बेल्ट: आदि शुक्ला और आश्रिया रावत।
ब्लू-1 बेल्ट: ईवा गुप्ता और ख्याति गुप्ता ।
ब्राउन-1 बेल्ट: अर्शी,
ब्राउन-2 बेल्ट: आयांश राज सिंह व सात्विक रावत।
ब्राउन-3 बेल्ट: रितिक दास।

