“प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना” के अंतर्गत सफलता की कहानी
गाजियाबाद। श्रीमती कल्याणी पत्नी सलैन्द्र सिरोही निवासी ग्राम समयपुर ब्लॉक रजापुर ने बताया कि मेरे पति दिहाड़ी मजदूर और किसान हैं। गर्भावरथा से पहले मैं भी उनके काम में मदद करती थी। जब मुझे अपनी गर्भावस्था के बारे में पता चला, तो मेरी आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण मुझे आर्थिक बोझ महसूस हुआ। यह मेरी पहली गर्भावस्था थी। फिर मुझे अपने गांव की आंगनवाड़ी (प्रिया) से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के बारे में पता चला, जिसके तहत 5000 रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि दी जाती है। मैंने आंगनवाड़ी केंद्र में अपना नाम दर्ज कराया और प्रथम (ए०एन०सी०) जाँच के होने के पश्चात पी०एम०एम०वी०वाई० योजना में पंजीकरण के बाद मुझे पहली किस्त के रूप में 3000 रुपये मिले, जिससे मुझे गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त आराम और पोषण प्राप्त करने में मदद मिली। प्रसब और बच्चे के पहले चार महीनों के पूर्ण टीकाकरण के बाद मैंने 2000 रुपये की दूसरी किस्त के लिए आवेदन किया और वह प्राप्त कर ली।
अब मेरा एक स्वस्थ बच्चा है और मैं सरकार की इस योजना की बहुत आभारी हूं, जिससे मुझ जैसी अन्य महिलाओं को मदद मिल रही है। अब मैं दूसरों को भी इस योजना के बारे में बता रही हूं और उनकी मदद कर रही हूं जिससे उन्हें भी लाभ मिल रहा है। इस योजना से लाभान्वित होने वाले ऐसे कई और लाभार्थी है जो सरकार के प्रति वास्तव में आभारी हैं क्योंकि सरकार ने उन्हें ऐसे लाभ प्रदान किए हैं जिनसे उनका जीवन सरल हो गया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमबीवाई) भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित एक मातृत्व लाभ योजना है, जिसके तहत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को रूपये 5,000 से रूपये 6,000 तक की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में प्रदान की जाती है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था और प्रसव के दौरान महिलाओं को बेहतर पोषण देना और मजदूरी के नुकसान की आंशिक भरपाई करना है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रिया के साथ कल्याणी।

