सिल्वरलाइन प्रेस्टीज स्कूल में वार्षिकोत्सव 2026 ‘पॉम पॉम शो’ ‘तारे जमीन पर’ का भव्य आयोजन

  • प्री-फाउंडेशन से कक्षा दो तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभा, सृजनशीलता, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास का दिया संदेश

गाजियाबाद। सिल्वरलाइन प्रेस्टीज स्कूल (एस. एल. पी. एस), सीनियर सेकेंडरी शाखा, गाजियाबाद में वार्षिकोत्सव ‘तारे जमीन पर’ का भव्य आयोजन किया गया। प्री-फाउंडेशन से कक्षा दो तक के नन्हे – मुन्हे विद्यार्थियों ने विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट प्रतिभा को पहचानने, उसकी अंतर्निहित क्षमताओं को विकसित करने तथा उसे अपनी आकांक्षाओं की पूर्ति करने हेतु प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। कार्यक्रम का मूल उद्देश्य बच्चों की व्यक्तिगत रुचियों, योग्यताओं और भावनाओं का सम्मान करते हुए उनके विकास के महत्त्व को रेखांकित करना रहा। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों का सम्मान एवं अभिनंदन किया गया तथा विद्यार्थियों द्वारा मधुर संगीत प्रस्तुत कर मुख्य अतिथिगण एवं अभिभावक गण का स्वागत किया ।
इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष डॉ. सुभाष जैन, श्रीमती बबीता जैन, उपाध्यक्ष नमन जैन, कार्यकारी निदेशक-रचनात्मक एवं अनुभवात्मक कार्यक्रम सुश्री मोनिका जैन, संस्थापक निदेशक डॉ. माला कपूर, निदेशक प्रशासन प्रणव जैन, निदेशक वित्त डॉ. स्वाति अग्रवाल, प्रधानाचार्या डॉ. गीता जोशी एवं रणनीति, कौशल एवं क्षमता निर्माण के निदेशक डॉ. सी. एस. नायर की उपस्थिति रही। अभिभावकों एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी समारोह में सहभागिता की।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में बाल्यावस्था की सहज अभिव्यक्ति, सपनों, पारिवारिक संबंधों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को केंद्र में रखकर विविध प्रस्तुतियाँ दी गईं। गणेश वंदना पर आधारित मनोहारी नृत्य से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात ‘खोल दे पर’, ‘गिव मी सम सनशाइन’, ‘मैं कभी बतलाता नहीं’ और ‘आल इज वेल’ जैसे गीतों पर विद्यार्थियों ने आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों के प्रति अभिभावकों की समझ, भावनात्मक सहयोग और प्रोत्साहन की आवश्यकता को उजागर किया गया। साथ ही, यह संदेश दिया गया कि बच्चों पर दूसरों से आगे निकलने का दबाव डालने के बजाय उनकी विशिष्ट क्षमताओं को पहचानकर उन्हें अपने सपनों को साकार करने के अवसर दिए जाने चाहिए।
कार्यक्रम के अगले चरण में विभिन्न प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के जीवन, उपलब्धियों और संघर्षों को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया। ‘मैथ में डब्बा गुल’ के माध्यम से महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन की असाधारण प्रतिभा को दर्शाया गया, जबकि ‘मैं राधा तेरी, तू मेरा श्याम’ की प्रस्तुति ने प्रख्यात कथक नर्तक पंडित बिरजू महाराज की अनुपम कला-साधना को सम्मानित किया। ‘दिल यह जिÞद्दी है’ के माध्यम से विश्वविख्यात मुक्केबाज मैरी कॉम के संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प को प्रस्तुत किया गया। वहीं, ‘शाबाशियाँ’ ने डिस्लेक्सिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा बच्चों की विविध अधिगम क्षमताओं को समझने और स्वीकार करने का संदेश दिया। उद्योगपति एवं समाजसेवी रतन टाटा के जीवन-मूल्यों से प्रेरित ‘आशाएँ’ ने आशावाद, परिश्रम, दूरदृष्टि और लक्ष्य के प्रति समर्पण की भावना को रेखांकित किया। समारोह का समापन ‘ठान लिया’ और ‘बादल पे पाँव हैं’ गीतों पर आधारित ऊर्जापूर्ण प्रस्तुतियों के साथ हुआ। विद्यार्थियों के उत्साह, आत्मविश्वास, समन्वय और मंचीय कौशल ने उपस्थित दर्शकों को प्रभावित किया। प्रत्येक प्रस्तुति ने इस विचार को सशक्त किया कि हर बच्चे में कोई न कोई विशिष्ट गुण और क्षमता होती है, जिसे उचित मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास और प्रोत्साहन के माध्यम से विकसित किया जा सकता है।
इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष डॉ. सुभाष जैन ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और उनकी महत्वकांक्षाओं को साकार करने हेतु पर्याप्त समय, विश्वास और प्रोत्साहन देने हेतु प्रेरित किया । उसके उपरांत बच्चों की रुचियों का सम्मान करने तथा उन्हें स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करने पर बल दिया। उपाध्यक्ष नमन जैन ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए शिक्षा में सृजनशीलता, अनुशासन और सामूहिक सहयोग की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। निदेशक प्रशासन श्री प्रणव जैन ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. गीता जोशी ने अपने संबोधन में बच्चों के विकास हेतु दृढ़ संकल्प, साहस और आत्मविश्वास को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियाँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों में सृजनात्मकता, भावनात्मक संतुलन, संवेदनशीलता और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करना भी है। उन्होंने बच्चों की व्यक्तिगत विशेषताओं को समझने तथा उन्हें अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने हेतु प्रेरित किया । वार्षिकोत्सव ‘तारे जमीन पर’ के माध्यम से सिल्वरलाइन प्रेस्टीज स्कूल ने प्रत्येक विद्यार्थी की विशिष्ट प्रतिभा को पहचानने और उसके विकास हेतु अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के अपने संकल्प को दोहराया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *