संघर्ष से सफलता तक फरजाना की कहानी

  • एनआरएलएम के सहयोग से गरीबी से उबरकर सफलता की राह पर बढ़ीं फरजाना

गाजियाबाद। मेरा नाम फरजाना है। मेरे गाँव का नाम (माछरा, जिला – मेरठ) ससुराल ग्राम बसंतपुर सैथली, ब्लॉक मुरादनगर, जिला- गाजियाबाद है। मेरी जिंदगी की शुरुआत बहुत साधारण थी, लेकिन इसमें मुश्किलों की कमी नहीं रही। मेरा बचपन एक गरीब परिवार में बीता। मेरे परिवार में पाँच बहन और एक भाई हैं। लेकिन मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दुःखद भरा समय तब आया जब मैं बहुत छोटी थी; मेरी माँ इस दुनिया को छोड़कर चली गईं। उस दिन के बाद हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। माँ के बिना घर सूना हो गया और बचपन की खुशियाँ जैसे खो गईं। मेरे पिता ने हमें संभालने के लिए दिन-रात मेहनत की। वे रिक्शा चलाकर हम सब का पेट भरते थे। उनकी मेहनत और संघर्ष को देखकर कई बार मेरी आँखें भर आती थीं। घर की हालत बहुत खराब थी, फिर भी हमने कभी हार नहीं मानी।
मैं शादी के बाद भी संघर्ष करती रही, मेरे पति ने मेरा हमेशा साथ दिया। धीरे-धीरे समय बदला। सन 2017 में जब मैं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी, तब मेरी जिंदगी में एक नई रोशनी आई। शुरुआत में मुझे कुछ समझ नहीं आता था, लेकिन मैंने सीखने की ठान ली और हर दिन कुछ नया सीखा और सभी मीटिंगों में भाग लेती थी। मुझे समझ आने लगा कि पढ़ाई भी जरूरी है। मुश्किलें बहुत थीं, पर मैंने हार नहीं मानी। मैंने 2017 में ही दाखिला लिया और सन 2023 में बीए पास किया। यह आसान नहीं था, बल्कि मेरी मेहनत और संघर्ष का परिणाम था। पढ़ाई के साथ-साथ मुझे खेल-कूद भी बहुत पसंद है। मैंने पढ़ाई के दौरान बहुत से खेल-कूद में भाग लिया और सम्मान भी प्राप्त किया है। मुझे समाजसेवा करना पसंद है। मैंने अपने गाँव में खुले में शौच मुक्त अभियान में भी प्रतिभाग किया और स्वच्छता अभियान को सफल बनाने में सरकार की मदद की। लोगों को समझाने में बहुत मुश्किल आई, पर मेहनत और संघर्ष हो तो सब आसान हो जाता है।
आज मैं ‘विद्युत् सखी’ के रूप में काम कर रही हूँ। गाँव-गाँव जाकर बिजली का बिल जमा करती हूँ और लोगों को उससे जुड़ी जानकारी देकर उनकी मदद करती हूँ। जब मैं किसी की मदद करती हूँ, तो मुझे अपने अंदर एक अलग ही खुशी महसूस होती है। मैंने अब तक चार करोड़ से ज्यादा का बिल जमा किया है और ढाई लाख से ज्यादा का कमीशन प्राप्त किया है। आज मैं जहाँ हूँ, वहाँ तक पहुँचने का रास्ता मुझे उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद मिला है।

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