- रोजगार दो सामाजिक न्याय दो पदयात्रा के तीसरे दिन गाजियाबाद में उमड़ा जनसैलाब
- जगह-जगह हुआ सांसद संजय सिंह का भव्य स्वागत, पुष्पवर्षा और माल्यार्पण से हुआ अभिनंदन
- लोहिया जी कहते थे-जेल संघर्ष का प्रतीक है, वोट परिवर्तन का प्रतीक है और फावड़ा रचनात्मक कार्यों का प्रतीक
- सरकारी स्कूल बंद और युवाओं का भविष्य संकट में, लेकिन असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा
- अगर सड़क खामोश रहेगी तो संसद आवारा हो जाएगी, आज भी प्रासंगिक है लोहिया जी की यह बात : संजय सिंह
- तपती गर्मी में कार्यकर्ताओं और जनता का जज्बा बता रहा कि बदलाव की लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है : सोमेंद्र ढाका
- रोजगार और सामाजिक न्याय की यह लड़ाई अब पूरे प्रदेश की जनता का आंदोलन बन चुकी है : निमित यादव
लखनऊ/गाजियाबाद। आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह के कुशल नेतृत्व में चल रही रोजगार दो-सामाजिक न्याय दो पदयात्रा के पांचवें चरण के तीसरे दिन की पदयात्रा सोमवार को गाजियाबाद से पूरे जोश, जुनून और जनउत्साह के साथ आगे बढ़ी। हक और सामाजिक न्याय की इस लड़ाई में उमड़े जनसैलाब और कार्यकर्ताओं के उत्साह ने साफ संकेत दिया कि जनता अब बदलाव चाहती है। भीषण गर्मी में भी पदयात्रा जहां-जहां से गुजरी वहां बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने सांसद संजय सिंह का पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और जोरदार स्वागत किया। स्थानीय नागरिकों, मजदूरों, छात्रों, व्यापारियों और रेडी-पटरी दुकानदारों ने सांसद संजय सिंह को रोककर अपनी समस्याएं साझा कीं और रोजगार, शिक्षा, महंगाई तथा सामाजिक न्याय के मुद्दों पर चर्चा की।
मीडिया से बातचीत करते हुए राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि देश में लाखों सरकारी स्कूल बंद हो गए और अकेले उत्तर प्रदेश में पचास हजार स्कूल बंद कर दिए गए, लेकिन किसी का खून नहीं खौलता। इन स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे गरीब, पिछड़े, दलित और वंचित परिवारों से आते हैं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि बेड पर कुत्ते बैठे मिलते हैं और मोमबत्ती की रोशनी में आॅपरेशन हो रहे हैं। नीट परीक्षा में पेपर लीक होने से लाखों बच्चों का भविष्य बर्बाद हो गया लेकिन इस पर भी कोई जवाबदेही तय नहीं हुई। पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद्य तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जनता महंगाई से परेशान है लेकिन असली मुद्दों की जगह हिंदू-मुस्लिम और नफरत की राजनीति परोसी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि टैक्स और मुनाफे के नाम पर लाखों करोड़ रुपये जनता से वसूले गए लेकिन जनता की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
संजय सिंह ने कहा कि चुनावों में खुलेआम धांधली हो रही है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में 27 लाख मतदाताओं को मतदान से रोका गया और अंतिम मतदाता सूची के बाद 6 लाख फर्जी वोट जोड़े गए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के क्षेत्र से भी 44 हजार वोट काट दिए गए। उन्होंने कहा कि जो नेता जांच एजेंसियों, पुलिस और दबाव की राजनीति से डर जाएगा वह विपक्ष की राजनीति नहीं कर सकता। इसके बावजूद आम आदमी पार्टी जनता के बीच मजबूती से खड़ी है और पंजाब में फिर सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि एक तरफ अरविंद केजरीवाल की राजनीति है जो जनता को अच्छे स्कूल, मुफ्त इलाज, बिजली, पानी, महिलाओं को सम्मान, मुफ्त बस यात्रा और बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा देती है तथा पंजाब में भगवंत मान सरकार अपने वादे निभा रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा की राजनीति केवल झूठे वादों पर टिकी है। न दो करोड़ रोजगार मिले, न पंद्रह लाख रुपये आए और न किसानों की आय दोगुनी हुई। वर्ष 2025 बीत जाने के बाद भी वादे केवल भाषणों तक सीमित हैं। एक तरफ नफरत की राजनीति है और दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान की राजनीति कर रही है।
सांसद संजय सिंह ने कहा कि यह पदयात्रा केवल यात्रा नहीं बल्कि हर उस युवा की आवाज है जो अपने सुनहरे भविष्य और हक के लिए संघर्ष कर रहा है। जब तक हर हाथ को काम और हर वर्ग को सम्मान नहीं मिलेगा, यह कारवां रुकने वाला नहीं है। उन्होंने जनता से आह्वान करते हुए कहा कि अगर उत्तर प्रदेश का भविष्य बदलना है तो बदलाव की इस पदयात्रा से जुड़ना होगा। उन्होंने कहा कि अपने पेट के लिए 22 घंटे जरूर दीजिए लेकिन कम से कम 2 घंटे देश और आम आदमी पार्टी के लिए भी जरूर निकालिए। सामाजिक परिवर्तन में समय जरूर लगता है लेकिन देश की जनता ने आम आदमी पार्टी की इस मुहिम को ताकत दी है और महज 12-13 वर्षों में दिल्ली, पंजाब, गुजरात, गोवा से लेकर उत्तर प्रदेश के निकायों तक मिले जनसमर्थन ने पार्टी को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया को याद करते हुए कहा कि जेल संघर्ष का प्रतीक है, वोट परिवर्तन का प्रतीक है और फावड़ा रचनात्मक कार्यों का प्रतीक है। सत्ता के लिए नहीं बल्कि जनता के हक और बदलाव के लिए संघर्ष करना ही असली राजनीति है। डॉ. लोहिया ने कहा था कि अगर सड़क खामोश रहेगी तो संसद आवारा हो जाएगी और आज यह बात बिल्कुल सच साबित हो रही है। जब सत्ता तानाशाही पर उतर आए और विरोधियों को प्रताड़ित करने लगे तब उस पर अंकुश लगाने के लिए सड़कों की राजनीति को जिंदा रखना बेहद जरूरी हो जाता है। पश्चिमी प्रांत अध्यक्ष सोमेंद्र ढाका ने कहा कि छियालिस डिग्री की भीषण गर्मी में अमरोहा के दीपचंद जी, जो दोनों आंखों से देख नहीं सकते, मेरठ से लगातार पदयात्रा में शामिल हैं। जिन्हें आंखों से दिखाई नहीं देता वे भी युवाओं की बेरोजगारी और समाज में हो रहे भेदभाव को महसूस कर रहे हैं लेकिन कुछ लोग घरों में बैठकर केवल चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे साथियों का संघर्ष और समर्पण बताता है कि परिवर्तन की लड़ाई अभी जीवित है और जनता अब पीछे हटने वाली नहीं है। जिला अध्यक्ष गाजियाबाद निमित्त यादव ने कहा कि अगर नीट परीक्षा में प्रभावित लाखों छात्र अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर आते तो सत्ता को जवाब देना पड़ता। मिर्जापुर, सोनभद्र और झारखंड सीमा से आए साथियों से लेकर सत्तर वर्ष की आयु में लगातार पदयात्रा कर रहे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का जज्बा इस बात का प्रमाण है कि देश के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून कभी खत्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि पिछले चार चरणों की सफलता और पांचवें चरण में मिल रहे अभूतपूर्व जनसमर्थन ने साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की जनता रोजगार, सामाजिक न्याय और बदलाव की राजनीति के साथ खड़ी है और यह पदयात्रा अपने उद्देश्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रही है।

