

गाजियाबाद। आई.टी.एस, मोहन नगर, गाजियाबाद द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित आई.टी.एस संवाद व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत एक विशेष सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन संस्थान के सभागार में किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महा निदेशक एवं केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के पूर्व उपमहानिदेशक डॉ. आर पी सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित थे, जिन्होंने अपने व्यापक अनुभव एवं गहन ज्ञान से विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को प्रेरित किया। इस अवसर पर अपने सन्देश में आईटीएस-द एजुकेशन ग्रुप के वाईस चेयरमैन अर्पित चड्ढा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कहा कि प्रभावी नेतृत्व के लिए परिस्थितियों के संदर्भ, वातावरण और स्थिति की गंभीरता को सही समय पर समझना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि दूरदर्शी और सजग नेतृत्व ही संकट की परिस्थितियों में संतुलित निर्णय लेकर संगठन को सुरक्षित रखते हुए उसे आगे बढ़ा सकता है। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि के स्वागत एवं माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष डीप प्रज्जवन के साथ हुआ । इस अवसर पर संस्थान के निदेशक, डॉ. सुनील कुमार पांडेय ने विशिष्ट वक्ता डॉ.एसपी सिंह का स्वागत करते हुए कहा कि आईटीएस संवाद व्याख्यान श्रृंखला का उद्देश्य विद्यार्थियों को उद्योग, प्रशासन एवं समाज के अनुभवी विशेषज्ञों से जोड़कर उन्हें व्यावहारिक ज्ञान एवं प्रेरणा प्रदान करना है, जिससे वे भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें। डॉ. पांडेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रभावी नेतृत्व का आधार केवल निर्णय लेने की क्षमता नहीं, बल्कि परिस्थितियों की सही समझ और समय की गंभीरता को पहचानने की क्षमता में निहित है। किसी भी संगठन या समाज में नेतृत्व की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि नेता अपने आसपास के वातावरण, उपलब्ध संसाधनों और संभावित जोखिमों का समुचित आकलन कर सके। उन्होंने आगे कहा कि आज का परिवेश अत्यंत गतिशील और अनिश्चितताओं से भरा हुआ है, जहाँ तकनीकी परिवर्तन, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, आर्थिक उतार-चढ़ाव और सामाजिक अपेक्षाएँ लगातार नई चुनौतियाँ प्रस्तुत कर रही हैं। ऐसे समय में यह अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि नेतृत्व केवल प्रतिक्रियात्मक न होकर दूरदर्शी और पूवार्नुमान आधारित हो, जिससे संभावित संकटों का समय रहते समाधान किया जा सके। कार्यक्रम में अपने सम्बोधन में डॉ. एस.पी. सिंह जी ने वर्तमान परिदृश्य में नेतृत्व, निर्णय-निर्माण क्षमता, नैतिक मूल्यों तथा बदलते सामाजिक एवं व्यावसायिक परिवेश में प्रभावी संवाद कौशल के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से बताया कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में युवाओं के लिए केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक समझ, सकारात्मक दृष्टिकोण और संकट की परिस्थितियों में उचित निर्णय लेने की क्षमता भी अत्यंत आवश्यक है। छात्रों से संवाद करते हुए डॉ सिंह ने विभिन्न जीवंत उदहारण एवं केस स्टडीज का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने अपने संबोध्दान में आगे कहा कि वर्तमान समय में नेतृत्व केवल अधिकार और आदेश देने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह अनुकूलनशीलता, सहयोग तथा अनिश्चित परिस्थितियों में त्वरित एवं सूचित निर्णय लेने की क्षमता से परिभाषित होता है। उन्होंने बताया कि आज के बदलते तकनीकी परिवेश, वैश्विक परिदृश्य और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के अनुरूप अपनी नेतृत्व शैली को निरंतर विकसित करना आवश्यक है। संकट प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि प्रभावी संकट नेतृत्व के लिए पूर्व तैयारी, परिस्थितिजन्य जागरूकता तथा सीमित जानकारी के बावजूद समय पर निर्णायक कदम उठाने का साहस अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि नेताओं को अपनी टीमों में लचीलापन, पारदर्शिता और विश्वास की संस्कृति विकसित करनी चाहिए, ताकि आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। इस अवसर पर आई टी (यू जी ) परिसर की प्राचार्या डॉ नैंसी शर्मा, संस्था के संकाय सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में अतिथि को स्मृति-चिह्न भेंट कर धन्यवाद ज्ञापन किया गया। काययक्रम का संचालन आईटीएस, मोहन नगर, गाजियाबाद निरंतर ऐसे शैक्षणिक एवं प्रेरणादायक कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

