- फार्मेसी केवल एक व्यावसायिक शिक्षा नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा जिम्मेदार क्षेत्र है: अर्पित चढ्डा
- आईटीएस कॉलेज में विश्व फार्मासिस्ट दिवस का आयोजन
- इस वर्ष थीम स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना रही
गाजियाबाद। मुरादनगर स्थित आईटीएस कॉलेज आॅफ फार्मेसी में विश्व फार्मासिस्ट दिवस – 2026 का आयोजन किया गया। इस वर्ष थीम स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना रही। कार्यक्रम का उद्देश्य फार्मासिस्टों की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका, विद्यार्थियों के व्यावसायिक विकास तथा समाज के स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य के निर्माण में फामेर्सी क्षेत्र के योगदान को रेखांकित करना रहा। जिसमें कॉलेज के लगभग 200 छात्रों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ आईटीएस- द एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन डॉ. आरपी चढ्डा, वाइस चेयरमैन अर्पित चढ्डा, जनसंपर्क निदेशक सुरेन्द्र सूद, मुख्य अतिथि डॉ. एम0 कलाइवानी, संदीप सोनी, पूर्व छात्र आईटीएस कॉलेज आॅफ फार्मेसी नितिन राजपूत, संस्थान के निदेशक डॉ. एस सदीश कुमार एवं संस्थान की डीन डॉ. राजकुमारी द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. एम कलाइवानी ने अपने संबोधन में फार्मासिस्टों की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में बढ़ती जिम्मेदारियों एवं महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य के फार्मासिस्ट के रूप में स्वयं को सशक्त बनाने के लिए ज्ञान, कौशल, व्यावहारिक दक्षता, नेतृत्व क्षमता एवं निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को फार्मेसी के क्षेत्र में निरंतर ज्ञान अर्जित करने तथा नवीनतम वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति से स्वयं को अपडेट रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने फार्मेसी काउंसिल आॅफ इंडिया की भूमिका एवं फार्मेसी शिक्षा तथा पेशे के नियमन से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं की संक्षिप्त जानकारी विद्यार्थियों के साथ साझा की। साथ ही उन्होंने फार्माकोविजिलेंस (औषधि सुरक्षा निगरानी) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि औषधियों के उपयोग के दौरान होने वाली प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रियाओं की पहचान, निगरानी एवं रिपोर्टिंग रोगी सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रियाओं की उचित पहचान एवं रिपोर्टिंग के बारे में जागरूक किया तथा फार्मासिस्टों की इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। अंत में उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं उपस्थित जनों को विश्व फार्मासिस्ट दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
विशिष्ट अतिथि संदीप सोनी, परामर्शदाता मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक, विक्स हेल्थकेयर, दिल्ली ने अपने संबोधन में फार्मासिस्टों की भूमिका एवं जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में फार्मासिस्ट केवल औषधियों के वितरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि औषधियों के सुरक्षित एवं तर्कसंगत उपयोग, रोगी जागरूकता तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं फार्मासिस्टों के महत्व एवं समाज में उनकी भूमिका को विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए उनके द्वारा स्वयं तैयार की गई एक विशेष वीडियो प्रस्तुति भी प्रदर्शित की गई। वीडियो के माध्यम से फार्मासिस्टों द्वारा स्वास्थ्य सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे योगदान को रचनात्मक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे विद्यार्थियों एवं उपस्थित जनों ने सराहा। उन्होंने फामेर्सी के क्षेत्र में उभरते हुए नए व्यावसायिक एवं पेशेवर अवसरों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में फार्मासिस्टों के लिए पारंपरिक भूमिकाओं के साथ-साथ हेल्थ काउंसलर, रोगी परामर्शदाता तथा स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में भी कार्य करने की संभावनाएँ बढ़ रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को इन नए क्षेत्रों की संभावनाओं को समझने और अपने कौशल के अनुरूप नए अवसरों के लिए स्वयं को तैयार करने के लिए प्रेरित किया।अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कोविड-19 महामारी के चुनौतीपूर्ण समय को भी याद किया और उस दौरान फार्मासिस्टों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने उस कठिन समय में फार्मासिस्ट समुदाय द्वारा किए गए योगदान एवं सेवाओं को स्मरण करते हुए विद्यार्थियों को अपने पेशे की सामाजिक जिम्मेदारी को समझने का संदेश दिया।
आईटीएस कॉलेज आॅफ फार्मेसी के पूर्व छात्र नितिन राजपूत, निदेशक, एनसीआर हेल्थकेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, फरीदाबाद, हरियाणा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कॉलेज जीवन उनके व्यावसायिक जीवन की नींव रखने वाला महत्वपूर्ण चरण रहा है। उन्होंने अपने कॉलेज जीवन से लेकर वर्तमान पेशेवर जीवन तक की यात्रा के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए और बताया कि किस प्रकार कॉलेज में प्राप्त शिक्षा, शिक्षकों का मार्गदर्शन, अनुशासन तथा निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ने उनके करियर को दिशा प्रदान की। उन्होंने अपने करियर की शुरूआत, पहली नौकरी के अनुभव, कार्यस्थल पर आने वाली चुनौतियों तथा विभिन्न जिम्मेदारियों को निभाते हुए आगे बढ़ने की यात्रा के बारे में विद्यार्थियों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि करियर में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विषय का मजबूत ज्ञान, व्यावहारिक अनुभव, मेहनत, धैर्य और सीखने की निरंतर इच्छा आवश्यक है।
इस अवसर पर डॉ. आरपी चढ्डा, चेयरमैन, आईटीएस- द एजुकेशन ग्रुप ने अपने स्वागत प्रेरणादायक संबोधन में सभी अतिथियों, शिक्षकों, एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि फार्मासिस्ट स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं जिम्मेदार अंग हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में फार्मेसी का क्षेत्र केवल औषधियों के निर्माण एवं वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि रोगी की सुरक्षा, औषधियों के उचित एवं तर्कसंगत उपयोग, स्वास्थ्य जागरूकता, अनुसंधान तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं में फार्मासिस्टों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
अर्पित चढ्डा, वाइस चेयरमैन, आईटीएस- द एजुकेशन ग्रुप ने कहा कि फार्मेसी केवल एक व्यावसायिक शिक्षा नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य एवं समाज की सेवा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण एवं जिम्मेदार क्षेत्र है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए संस्थान के निदेशक, शिक्षकों, आयोजन समिति एवं विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में उपस्थित सुरेन्द्र सूद ने अपने संबोधन में कहा कि फार्मासिस्ट स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था की एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी हैं और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा में उनकी भूमिका अत्यंत व्यापक एवं जिम्मेदारीपूर्ण है।उन्होंने कहा कि विश्व के करोड़ों लोगों तक गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं प्रभावी औषधियां पहुंचाने में फार्मासिस्टों की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित आईटीएस कॉलेज आॅफ फार्मेसी के पूर्व छात्र नितिन राजपूत जो कि एक सफल पेशेवर हैं। उन्होंने ने बताया कि भारतीय फार्मार्कोपिया विश्व के लगभग 25 देशों मे उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारा मस्तिष्क प्रत्येक क्षण बदलता रहता है, इस प्रकार वर्ष के अन्त में प्रत्येक छात्र के पास लगभग 365 विचार हो सकते हंै।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के निदेशक डॉ. एस. सदीश कुमार ने अपने संबोधन में सभी सम्मानित अतिथियों, शिक्षकों, एवं विद्यार्थियों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। अपने संबोधन में उन्होंने विश्व फार्मासिस्ट दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फार्मासिस्ट स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग हैं तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं औषधियों के सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि बदलते स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में फार्मासिस्टों की जिम्मेदारियाँ निरंतर बढ़ रही हैं और विद्यार्थियों को भविष्य की इन चुनौतियों के लिए अभी से स्वयं को तैयार करना चाहिए।
विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के अंतर्गत विद्यार्थियों के ज्ञान एवं प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फार्मा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता (फार्मा क्विज), पोस्टर प्रस्तुतियों, समुदाय भ्रमण एवं सामुदायिक जागरूकता जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न गतिविधियों में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक एवं सक्रिय रूप से भाग लिया। विद्यार्थियों ने फार्मा प्रश्नोत्तरी, पोस्टर प्रस्तुतियों, सामुदायिक भ्रमण तथा अन्य आयोजन संबंधी गतिविधियों में अपनी प्रतिभा एवं टीम भावना का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरण, धन्यवाद ज्ञापन व राष्ट्रगान के साथ हुआ। विश्व फार्मासिस्ट दिवस का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं अनुभवात्मक रहा, जिसने उन्हें फामेर्सी के क्षेत्र में अपने पेशेवर एवं सामाजिक दायित्वों को समझने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन संस्थान की डीन डॉ. राजकुमारी, मिस. साक्षी चौहान एवं मि. मनीष कुमार ने किया।




