- छोटी उम्र,बड़ी उड़ान : मॉडलिंग, नृत्य, योग और खेलों में नन्ही तोषिता का शानदार प्रदर्शन
- तोषिता की उड़ान अभी शुरू हुई है, मंजिलें अभी बहुत बाकी हैं
गाजियाबाद। उम्र महज 7 वर्ष, लेकिन सपने बड़े और हौसला उससे भी बड़ा। गाजियाबाद के सदरपुर गांव की रहने वाली नन्ही प्रतिभा तोषिता चौधरी अपनी कम उम्र में ही मॉडलिंग, नृत्य, योग, खेल और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। सेंट पॉल्स स्कूल में कक्षा 2 की छात्रा तोषिता मात्र ढाई वर्ष की उम्र से मॉडलिंग की दुनिया में सक्रिय हैं और अब तक कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। तोषिता तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनकी सफलता के पीछे उनकी मां आशा का महत्वपूर्ण योगदान है गृहिणी और सिंगल मदर होने के बावजूद आशा ने अपनी बेटी के सपनों को कभी सीमित नहीं होने दिया। सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बीच बेटी को निरंतर प्रोत्साहित करना और उसके सपनों को उड़ान देना उनके समर्पण और मातृत्व की मिसाल है।
तोषिता ने राइजिंग प्रोडक्शन, किमाया डांस स्टूडियो, चाइल्ड ड्रीम बूस्टर, इंडिया डांस पावर, इंडिया किड्स फैशन वीक, दिल्ली किड्स फैशन वीक, एआर अनस्टॉपेबल डांस स्टूडियो, नेशनल हेरिटेज आइकॉन बाय अर्डेंट्स और जूनियर मिस इंडिया सहित अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। विभिन्न प्रतियोगिताओं और आयोजनों में उनके नाम कई पदक, ट्रॉफियां और प्रमाण-पत्र दर्ज हैं।
बहुआयामी प्रतिभा की धनी हैं तोषिता मॉडलिंग के साथ-साथ तोषिता नृत्य, योग, अबेकस, खेल तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भी सक्रिय हैं। उन्हें बचपन से ही मेकअप और रचनात्मक शैली-सज्जा में विशेष रुचि रही है। वह इसे केवल शौक के रूप में नहीं, बल्कि अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के एक माध्यम के रूप में देखती हैं।
तोषिता को अपनी प्रतिभा को मंच देने में श्री कुशल शर्मा जाट का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। वहीं अशोक अवॉर्डी श्रीमती चारू शर्मा से मिली प्रेरणा ने उनके भीतर मॉडलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास और मजबूत किया। तोषिता की कहानी केवल पुरस्कारों, पदकों और मंचों तक सीमित नहीं है। यह एक मां और बेटी के उस संघर्ष, विश्वास और जुनून की कहानी है, जिन्होंने परिस्थितियों को अपने रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया। जहां अधिकांश बच्चे इस उम्र में अपने सपनों को समझना शुरू करते हैं, वहीं तोषिता मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के माध्यम से उन्हें साकार करने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। उनकी मां आशा का मानना है कि बेटी भविष्य में जिस भी क्षेत्र को चुने, वह मेहनत, संस्कार, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ अपनी अलग पहचान बनाए। वहीं तोषिता का उत्साह प्रत्येक नए मंच और अवसर के साथ लगातार बढ़ रहा है। सदरपुर गांव की यह नन्ही प्रतिभा आज समाज को यह संदेश दे रही है कि सपनों की ऊंचाई उम्र या परिस्थितियों से तय नहीं होती। सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत के बल पर छोटे-छोटे कदम भी बड़ी मंजिल की शुरूआत बन सकते हैं।



