
गाजियाबाद। आईटीएस गाजियाबाद के चाणक्य आॅडिटोरियम में भारतीय हास्य कलाकार एवं उपन्यासकार शंभू शेखर द्वारा स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों हेतु हास्य कविता पाठ का सफल एवं आकर्षक मंचन किया गया। सर्व प्रथम हास्य कवि शंभू शेखर, आई. टी. एस -द एजुकेशन ग्रुप के वाइस चेयरमैन अर्पित चड्ढा, आई. टी. एस मोहन नगर गाजियाबाद के निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय कुमार, प्रो. (डॉ.) सुनील कुमार पांडेय, निदेशक, आई. टी. एस गाजियाबाद तथा डॉ. नैन्सी शर्मा, प्राचार्या, यू.जी. कैंपस आई.टी.एस, मोहन नगर, गाजिÞयाबाद द्वारा मां सरस्वती के समक्ष पारंपरिक दीप प्रज्जवलन किया गया।
इस सत्र का उद्देश्य एक ऐसा प्रेरणादायक एवं बौद्धिक रूप से स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों में समृद्ध हास्य पूर्ण वातावरण प्रदान करना था, जिसमें हास्य के माध्यम से गहन विचारों का समावेश हो। इस अनूठे प्रयास के माध्यम से विद्यार्थियों में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना, आत्मविश्वास बढ़ाना तथा व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक चुनौतियों का सामना धैर्य, अनुकूलनशीलता एवं रचनात्मकता के साथ करने की प्रेरणा देना प्रमुख लक्ष्य रहा। आई. टी. एस -द एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन डॉ. आर पी चड्ढा ने इस प्रकार के आयोजन हेतु सभी को अपनी शुभकामनाएं दी तथा छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। आई. टी. एस -द एजुकेशन ग्रुप के वाइस चेयरमैन अर्पित चड्ढा ने विशिष्ट अतिथि शंभू शेखर को पुष्पगुच्छ, शॉल, उपहार एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया। इसके उपरांत अपने स्वागत संबोधन में अर्पित चड्ढा ने शंभू शेखर की प्रशंसा करते हुए उनके साथ अपने पूर्व अनुभवों को साझा किया और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सत्र सभी के लिए अत्यंत आनंददायक एवं प्रेरणादायक सिद्ध होगा। उनके संबोधन ने पूरे कार्यक्रम के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया।
इसके पश्चात शंभू शेखर ने सत्र की शुरूआत करते हुए उपाध्यक्ष अर्पित चड्ढा का आभार व्यक्त किया तथा प्रो. (डॉ.) अजय कुमार को इस कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु धन्यवाद दिया। उन्होंने अत्यंत सहजता से श्रोताओं से संवाद स्थापित किया और अपने हास्य एवं कथन शैली से सभी को आकर्षित किया। उन्होंने दैनिक जीवन की घटनाओं, कॉलेज जीवन, पारिवारिक संबंधों एवं समसामयिक सामाजिक-राजनीतिक संदर्भों को हास्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे श्रोता स्वयं को उनसे जुड़ा हुआ महसूस कर सके।
उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति, प्रभावशाली अभिव्यक्ति एवं सटीक हास्य समय-प्रबंधन ने पूरे सत्र के दौरान श्रोताओं को बांधे रखा। सभागार में निरंतर हंसी और तालियों की गूंज सुनाई देती रही, जो विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी एवं उत्साह को दशार्ती है। यह सत्र एक जीवंत एवं संवादात्मक शिक्षण वातावरण बनाने में पूर्णत: सफल रहा।
कार्यक्रम के समापन से पूर्व प्रो. (डॉ.) अजय कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने अतिथि वक्ता एवं आयोजन में सहयोग करने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके पश्चात श्री शंभू शेखर ने पुन: श्रोताओं को संबोधित किया, इस बार उन्होंने प्रेरणादायक विचार साझा किए। उन्होंने जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए धैर्य, आत्मविश्वास एवं सकारात्मक दृष्टिकोण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी विशिष्टता को स्वीकार करने, अपनी क्षमताओं को पहचानने तथा असफलताओं को सीखने एवं आगे बढ़ने के अवसर के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया। अंतत: यह सत्र अत्यंत प्रेरणादायक एवं उत्साहवर्धक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का समापन समूह छायाचित्र के साथ किया गया, जिससे इस यादगार अवसर को संजोया जा सके।

