सूर्यपुत्र कर्ण के त्याग, अदम्य साहस, स्वाभिमान और वचनबद्धता की गाथा ने दर्शकों को किया भावविभोरकाल भैरव गाने पर विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने वातावरण में एक अलौकिक आभा का संचार किया
गाज़ियाबाद। सिल्वरलाइन प्रेस्टीज स्कूल, सीनियर सेकेंडरी शाखा, गाज़ियाबाद के परिसर में वार्षिकोत्सव ‘उमंग 2026’ के अंतर्गत ‘दानवीर कर्ण’- “गाथा त्याग व ज्ञान की” का प्रभावशाली एवं भावपूर्ण नाट्य मंचन किया गया। कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों ने अपने सजीव अभिनय और सशक्त संवादों के माध्यम से महाभारत के महान योद्धा सूर्यपुत्र कर्ण के जीवन, संघर्ष, अद्वितीय उदारता, अदम्य पराक्रम और वचन के प्रति अटूट निष्ठा को मंच पर साकार कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के बैंड की ऊर्जामय एवं आकर्षक प्रस्तुति से हुआ, जिसने संपूर्ण वातावरण को संगीतमय और उत्साहपूर्ण बना दिया। विद्यालय के अध्यक्ष डॉ. सुभाष जैन के सानिध्य में मुख्य अतिथि अमित गुप्ता (डिस्ट्रिक्ट गवर्नर) एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर अध्यक्ष, डॉ. सुभाष जैन ने अतिथियों का अभिनंदन करते हुए उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट किए तथा उनके बहुमूल्य समय एवं गरिमामयी उपस्थिति के प्रति आभार व्यक्त किया।
संगीतमय प्रस्तुतियों ने समारोह की भव्यता में विशेष रंग भर दिए। कॉन्गो, गिटार और कैसियो जैसे वाद्य-यंत्रों पर विद्यार्थियों ने सुर, ताल और लय का मनोहारी समन्वय प्रस्तुत किया। उनकी संगीत-साधना, लयबद्धता और सामूहिक तालमेल ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
काल भैरव गाने पर विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने वातावरण में एक अलौकिक आभा का संचार किया, साथ ही भरी भरी गाने पर कुंती द्वारा किया गया नृत्य अनुपम रहा। नाट्य प्रस्तुति में कर्ण के जीवन के विभिन्न महत्त्वपूर्ण प्रसंगों को क्रमबद्ध एवं प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। उनके जन्म से जुड़ी घटनाओं, शिक्षा-दीक्षा, युद्ध-कौशल के प्रशिक्षण तथा सूतपुत्र होने के कारण उन्हें समय-समय पर सामाजिक उपेक्षा और अपमान के दृश्यों ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने वचन और दानधर्म के प्रति अडिग रहने वाले कर्ण के चरित्र ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। विद्यार्थियों के उत्कृष्ट अभिनय, नृत्य और सामूहिक प्रयासों ने वार्षिकोत्सव ‘उमंग 2026’ एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बना दिया।
विद्यालय के अध्यक्ष डॉ. सुभाष जैन ने अपने संबोधन में बच्चों के सम्पूर्ण विकास हेतु समय, विश्वास और सकारात्मक प्रोत्साहन की महत्ता पर विशेष बल दिया । उन्होंने कहा कि बच्चों में भारत की गौरवशाली ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और समझ विकसित करना आवश्यक है, ताकि वे आत्मविश्वास से परिपूर्ण, उत्तरदायी तथा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े नागरिक बन सकें।
विद्यालय के उपाध्यक्ष नमन जैन ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के समर्पण और सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए आधुनिक शिक्षा में नवाचार, अनुशासन, तकनीकी दक्षता और सहभागितापूर्ण अधिगम की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने इन गुणों को विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बताया।
निदेशक प्रशासन प्रणव जैन ने समारोह को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी गणमान्य अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने सभी के सहयोग और सहभागिता को आयोजन की सफलता का महत्त्वपूर्ण आधार बताया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. गीता जोशी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षिक ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वासी, संवेदनशील, सृजनशील और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों की अंतर्निहित प्रतिभाओं को पहचानने, उनकी विशिष्ट क्षमताओं को निखारने तथा उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने में विद्यालय और परिवार की सांझी भूमिका पर बल दिया।
सिल्वरलाइन प्रेस्टीज स्कूल ने विद्यार्थियों के संपूर्ण विकास एवं समग्र शिक्षण के अपने ध्येय को पुनः दोहराते हुए उन्हें आत्मविश्वास से परिपूर्ण, भविष्य की संभावनाओं और चुनौतियों के प्रति सजग तथा भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं एवं समृद्ध विरासत के प्रति गहरी संवेदनशीलता रखने वाले सशक्त, जागरूक और उत्तरदायी नागरिकों के रूप में गढ़ने की अपनी प्रतिबद्धता को अभिव्यक्त किया।










