आई.टी.एस . स्कूल ऑफ मैनेजमेंट द्वारा पीजीडीएम (बैच 2024–2026) के विद्यार्थियों के लिए किया गया दीक्षांत समारोह का आयोजन

गाजियाबाद : आई.टी.एस. स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, गाजियाबाद के 28वें दीक्षांत समारोह का आयोजन चाणक्य ऑडिटोरियम में पीजीडीएम (2024–26 बैच) के स्नातक विद्यार्थियों के लिए किया गया। समारोह का शुभारंभ मास्टर ऑफ सेरेमनी प्रो. याचना मल्होत्रा द्वारा दीक्षांत समारोह के औपचारिक परिचय के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई।
इसके बाद 28वें दीक्षांत समारोह के औपचारिक रूप से प्रारंभ होने की घोषणा की गई, जिससे शैक्षणिक कार्यक्रमों का विधिवत शुभारंभ हुआ। प्रो. (डॉ.) अजय कुमार, निदेशक, आई.टी.एस. स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया तथा संस्थान की रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने संस्थान की शैक्षणिक एवं संस्थागत उपलब्धियों तथा विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि व्यावसायिक जगत तेजी से बदल रहा है और सूचना नवाचार की मुद्रा बन चुकी है।
डॉ. डी.के. पांडे, चेयरपर्सन, पीजीडीएम ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को दीक्षांत शपथ दिलाई। शपथ के माध्यम से विद्यार्थियों ने सत्यनिष्ठा, नैतिक मूल्यों, व्यावसायिक उत्तरदायित्व तथा अपने पेशे की गरिमा को बनाए रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने पीजीडीएम कार्यक्रम की एआईसीटीई मान्यता का उल्लेख करते हुए बताया कि 2024–26 बैच के कुल 170 विद्यार्थियों ने कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने भी दीक्षांत शपथ ग्रहण की। इसके पश्चात विशिष्ट अतिथियों ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित किया।
डॉ. रंजीत मेहता, सीईओ एवं महासचिव, पीएचडीसीसीआई ने कहा कि सोचने की क्षमता ही व्यक्ति को विशिष्ट बनाती है। उन्होंने जीवन में BASE Framework – Belief (विश्वास), Attitude (दृष्टिकोण), Self-discipline (आत्म-अनुशासन) और Enthusiasm (उत्साह) को अपनाने के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की जीवन-यात्रा को आकार देने में उसके दृष्टिकोण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
कुलदीप सिंह, चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक, एच.आई.एल. (इंडिया) लिमिटेड ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल एआई का उपयोग करना सीखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनशीलता उससे भी अधिक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि Learning, Unlearning और Relearning को अपने जीवन का मूलमंत्र बनाएं।
प्रो. (डॉ.) राज सिंह, कुलपति, बेनेट यूनिवर्सिटी ने दीक्षांत संबोधन प्रस्तुत किया तथा विद्यार्थियों के व्यावसायिक जीवन की नई यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर अपने मूल्यवान विचार एवं मार्गदर्शन साझा किए। उन्होंने कहा कि करियर बनाने से अधिक महत्वपूर्ण अपनी प्रतिष्ठा का निर्माण करना है और एक सुदृढ़ संस्कृति के निर्माण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को विनम्र एवं कृतज्ञ बने रहने तथा उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया, जिन्होंने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचने में सहयोग दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की भी सलाह दी।
समारोह का एक महत्वपूर्ण आकर्षण बैच टॉपर्स की घोषणा एवं उपाधियों का वितरण रहा। बैच की उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों को स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। सर्वज्ञ गोयल ने प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक, प्राची शर्मा ने द्वितीय स्थान प्राप्त कर रजत पदक, जबकि आकाश चौहान ने तृतीय स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक प्राप्त किया।
विशेषज्ञता के आधार पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। मार्केटिंग में सिमरन प्रजापति, मानव संसाधन (HR) में आकाश चौहान, फाइनेंस में सर्वज्ञ गोयल, इंटरनेशनल बिजनेस में शुभांगी शर्मा, बिजनेस एनालिटिक्स में प्रांशु अग्रवाल तथा ऑपरेशंस मैनेजमेंट में सर्वज्ञ गोयल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
औपचारिक कार्यक्रम का समापन स्मृति चिह्नों के वितरण के साथ हुआ, जिसके पश्चात दीक्षांत समारोह के समापन की घोषणा की गई। इसके बाद सभी उपस्थित लोगों ने सम्मानपूर्वक खड़े होकर राष्ट्रगान में भाग लिया। समारोह का समापन दीक्षांत जुलूस के औपचारिक प्रस्थान के साथ हुआ, जिसके पश्चात सामूहिक फोटोग्राफी की गई।
28वाँ दीक्षांत समारोह पीजीडीएम (2024–26) बैच की शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव मनाने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर रहा। गरिमापूर्ण समारोह, दीक्षांत शपथ, विशिष्ट अतिथियों के प्रेरणादायी संबोधन, उपाधि वितरण तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता के सम्मान ने इस अवसर को उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों एवं संस्थान के लिए एक स्मरणीय उपलब्धि बना दिया।

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