- लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट ने गांधी जी व शास्त्री जी की जयंती मनाई असत्य, अन्याय प्रतिकार दिवस के रूप में
- अब राजनीति में जातिवाद, धार्मिक पाखंड, झूठ, लूट अनैतिकता का बोलबाला है


गाजियाबाद। ज्ञानपीठ केन्द्र 1, स्वरुप पार्क जीटी रोड साहिबाबाद के प्रांगण में लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन कार्यक्रम असत्य, अन्याय, प्रतिकार दिवस के रूप में आयोजित किया गया, विद्वानों ने विचार गोष्ठी में विचार रखे, राष्ट्रपिता व पूर्व प्रधानमंत्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें स्मरण करते हुए उनके द्वारा व्यक्ति, समाज और देश के सर्वांगीण विकास में किये गये सराहनीय कार्यों को याद करते हुए चलने का संकल्प लिया गया, कार्यक्रम में महापुरुष द्वय के सम्मान में जोरदार नारे लगाये गये, भजन, देश-प्रेम गीत भी प्रस्तुत किया गया, लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट के संस्थापक /अध्यक्ष राम दुलार यादव शिक्षाविद मुख्य वक्ता कार्यक्रम में शामिल रहे े
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजवादी चिन्तक एवं शिक्षाविद रामदुलार यादव ने कहा कि महात्मा गाँधी और लाल बहादुर शास्त्री जी का व्यक्तित्व और कृतित्व देश, समाज, व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए आज भी प्रासंगिक है, वे सत्य, अहिंसा, करुणा, दया की प्रतिमूर्ति रहे, असत्य और अन्याय का जीवन भर प्रतिकार किया, अपने दृढ विचार पर अडिग होने के कारण देश, विदेश में उन्हें शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी तथा उन्हें नस्ली भेदभाव का शिकार होना पड़ा, लेकिन असत्य, अन्याय के प्रतिकार का वहीँ पर बीजारोपण हुआ, 21 वर्ष बाद जब महात्मा गाँधी जी भारत आये तो उन्होंने न केवल स्वतंत्रता आन्दोलन चलाया बल्कि उपेक्षित, पीड़ित, अस्पृश्य और सामन्ती सोच से जन-जन को राहत दिलाने के लिए संघर्ष किया, उन्होंने देश को आजाद कराने तथा जन-कल्याण के लिए चंपारण आन्दोलन, असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन, नमक कानून और भारत छोडो आन्दोलन को धार दिया, अंग्रेजों की अन्यायी, शोषण, झूठ और लूट की सरकार की चूलें हिला दिया, परिणाम देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। नेल्सन मंडेला फाउन्डेशन के मुख्य कार्याधिकारी ने गाँधी जी के सपनों का भारत बनाने के लिए कहा था कि जब बेहतर इन्सान बनेगा तभी दुनिया का अच्छा निर्माण होगा लेकिन आज सार्वजनिक जीवन में झूठ और निर्लज्जता पूर्वक लूट को सफलता का पैमाना माना जा रहा है, 79 वर्ष आजादी के बाद भी हम गाँधी और लाल बहादुर शास्त्री के सपनों का भारत नहीं बना पाए, सादगी, सरलता, सत्य, अहिंसा अपनाना तो दूर की कौड़ी हो गयी है, निजी जीवन में देश के संसाधनों का प्रयोग शर्मनाक और चिंताजनक है।
श्री यादव ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री जी गाँधी जी के विचार के ध्वजवाहक नैतिक मूल्यों के प्रति समर्पित महामानव रहे, उन्होंने ही संकटकाल में जय जवान, जय किसान का नारा दिया, तभी खाद्यान्न संकट से देश में हरित क्रान्ति, श्वेत क्रान्ति का आह्वान कर लोगों को तैयार किया, जिससे किसान आत्म निर्भर हुआ। वह ईमानदारी की मिसाल, सार्वजानिक जीवन में भ्रष्टाचार के घोर विरोधी रहे, गांधी जी के भारत को आजाद कराने के सभी जैसे असहयोग आन्दोलन से लेकर भारत छोड़ों आन्दोलन में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभा महात्मा गाँधी के करो या मरो के आह्वान को विस्तार देते हुए कहा मरो नहीं मारो। आज स्थिति पूरी तरह बदल गयी है अब राजनीति में जातिवाद, धार्मिक पाखंड, झूठ, लूट अनैतिकता का बोलबाला है, यह असत्य, अन्याय का प्रतिकार कर ही पटरी पर आ सकता है, इन महापुरुषों ने कभी भी नहीं सोचा होगा कि आजादी के 79 वर्ष बाद भी आधी आबादी शिक्षा, चिकित्सा से वंचित निरक्षर, आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक संकट का सामना करने के लिए अभिशप्त हो रही होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य डा. विशन लाल गौड़ ने, संचालन श्रमिक नेता अनिल मिश्र ने, आयोजन इंजीनियर धीरेन्द्र यादव ने किया, मुख्य अतिथि उदयांचल यदुवंश कल्याण समिति के संरक्षक एसएस प्रसाद रहे। कार्यक्रम को जगन्नाथ प्रसाद, राम प्यारे यादव, जयनारायण शर्मा, अर्जुन सिंह यादव, कैलाश चन्द्र, सीबी मौर्य ने भी संबोधित किया। कृष्णानंद यादव, राजेन्द्र सिंह, हुकुम सिंह, अनीता यादव ने देश-प्रेम के गीत और भजन सुना सभी को आत्म विभोर कर दिया। ताहिर अली ने ज्ञानपीठ सन्देश लोकतंत्र बचाना है, संविधान बचाना है सुनाकर सभी से एक कदम विचार पर चलने का अनुरोध किया , कार्यक्रम के अंत में भोजन प्रसाद का सभी ने आनन्द लिया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कैलाश चन्द्र, सीबी मौर्य, देवकर्ण चौहान, काली चरण, अर्जुन सिंह यादव, सम्राट सिंह, मुनीव यादव, महेन्द्र यादव, कृष्णा यादव, ओम प्रकाश अरोड़ा, ब्रह्म प्रकाश, विश्वनाथ यादव, बिजेन्द्र यादव, श्री निवास यादव, शैलजा शर्मा, शम्भू नाथ जायसवाल, अवधेश मौर्य, अंकित यादव, सतबीर यादव, चिंतामणि यादव, ऋतिक बघेल, अनीता यादव, सुदर्शन आदि ने पुष्प अर्पित किए।


