केआईईटी विश्वविद्यालय ने नए छात्रों और कर्मचारियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक कैंपस संस्कृति से कराया परिचित

गाजियाबाद। केआईईटी मानद विश्वविद्यालय की ‘इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी’ और ‘जेंडर सेंसिटाइजेशन सेल’ ने सभी एकेडमिक कोर्स के फर्स्ट-ईयर स्टूडेंट्स और नए शामिल हुए फैकल्टी व स्टाफ के लिए इंडक्शन प्रोग्राम के तहत जागरूकता कार्यक्रमों की एक व्यापक सीरीज आयोजित की। इस पहल का मकसद यूनिवर्सिटी कम्युनिटी के नए सदस्यों को एक सुरक्षित, समावेशी, सम्मानजनक और जेंडर-सेंसिटिव कैंपस बनाने के संस्थान के संकल्प से परिचित कराना था। अवेयरनेस सेशन में हिस्सा लेने वालों को ‘इंटरनल कंप्लेंट्स कमिटी’ और ‘जेंडर सेंसिटाइजेशन सेल’ की भूमिकाओं और जिÞम्मेदारियों के बारे में बताया गया। साथ ही, ‘प्रिवेंशन आॅफ सेक्सुअल हैरेसमेंट’ एक्ट के प्रावधानों को असरदार ढंग से लागू करने और जेंडर इक्वालिटी, गरिमा और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया गया। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक ‘एफ’, श्री गौरव गुप्ता ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा पर एक विशेष सत्र आयोजित किया। इस सत्र में साइबर हाइजीन, आॅनलाइन सुरक्षा, जिÞम्मेदार डिजिटल व्यवहार, साइबर खतरों से बचाव और डिजिटल युग में व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। एडवोकेट दीपिका गोयल ने पॉश और जेंडर सेंसिटाइजेशन (लैंगिक संवेदनशीलता) पर एक जानकारीपूर्ण सेशन आयोजित किया। उन्होंने प्रतिभागियों को वर्कप्लेस एथिक्स (कार्यस्थल पर नैतिक आचरण), पॉश एक्ट के तहत कानूनी प्रावधानों, स्टेकहोल्डर्स के अधिकारों और जिÞम्मेदारियों, तथा समानता, गरिमा और सम्मान पर आधारित माहौल बनाने के महत्व के बारे में जागरूक किया। यह समझते हुए कि सेहत का मतलब सिर्फ़ शारीरिक सुरक्षा नहीं है, विश्वविद्यालय ने किशोरों की सेहत, साफ-सफाई और भलाई पर एक एक्सपर्ट सेशन भी आयोजित किया। यह सेशन नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर आॅन्कोलॉजिस्ट डॉ. पराग शर्मा और मोदीनगर के सूर्या हॉस्पिटल की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. कविता शर्मा ने मिलकर आयोजित किया। एक्सपर्ट्स ने किशोरों की सेहत, पर्सनल हाइजीन, बीमारियों से बचाव, मानसिक और भावनात्मक सेहत, और हेल्दी लाइफस्टाइल से जुड़े कई पहलुओं पर बात की और स्टूडेंट्स को सेहत से जुड़े सही और जिÞम्मेदार फैसले लेने के लिए प्रोत्साहित किया। इन सेशन के इंटरैक्टिव नेचर की वजह से पार्टिसिपेंट्स एक्सपर्ट्स के साथ बातचीत कर पाए, अपनी शंकाएं दूर कर पाए और सुरक्षा, स्वास्थ्य, जेंडर सेंसिटिविटी और डिजिटल जिÞम्मेदारी से जुड़े मुद्दों पर प्रैक्टिकल जानकारी हासिल कर पाए। इन पहलों के जरिए, ‘इंटरनल कंप्लेंट्स कमिटी’ और ‘जेंडर सेंसिटाइजेशन सेल’ ने विश्वविद्यालय के हर सदस्य के लिए सुरक्षित, समावेशी, स्वस्थ, समान और सम्मानजनक कैंपस कल्चर को बढ़ावा देने के अपने पक्के संकल्प को दोहराया। ये कार्यक्रम यूनिवर्सिटी की उन लगातार कोशिशों को दिखाते हैं जिनका मकसद जागरूकता बढ़ाना, जिÞम्मेदार नागरिकता को बढ़ावा देना, मानवीय गरिमा बनाए रखना और ऐसा माहौल बनाना है जहाँ हर व्यक्ति आत्मविश्वास और आपसी सम्मान के साथ सीख सके, काम कर सके और तरक्की कर सके।
सभी छात्रों, फैकल्टी और स्टाफ को गरिमा, सम्मान, समानता और समावेशिता के मूल्यों को बनाए रखने के महत्व के बारे में फिर से याद दिलाया गया। साथ ही, यूनिवर्सिटी को सभी के लिए एक सुरक्षित और स्वागतपूर्ण जगह बनाए रखने के प्रयास जारी रखने का सामूहिक आह्वान भी किया गया। यूनिवर्सिटी समुदाय के हर सदस्य को इस साझा विजन को साकार करने और ऐसा माहौल बनाने के लिए अपना समर्थन और प्रतिबद्धता देने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जहाँ हर कोई खुद को महत्वपूर्ण, सम्मानित और सशक्त महसूस करे।

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