आई.टी.एस. में ‘संवाद’ श्रृंखला के अंतर्गत “Towards a Passwordless World” विषय पर विशेष सत्र आयोजित

गाजियाबाद: आई.टी.एस., मोहन नगर, में प्रतिष्ठित ‘संवाद’ (SAMVAAD) व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत “Towards a Passwordless World” विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। यह सत्र “विकसित भारत 2047” की व्यापक परिकल्पना के संदर्भ में डिजिटल सुरक्षा, डिजिटल पहचान एवं भविष्य की सुरक्षित तकनीकी व्यवस्था पर केंद्रित रहा।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गौतम हज़ारी, Co-Founder, Sekura Mobile Intelligence, UK, पूर्व Chief Architect, Vodafone UK, पूर्व Worldwide Technical Director, GSMA तथा उद्योग-अग्रणी SAFr – Digital Identity & Network API Platform के आविष्कारक रहे।
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारम्भ मान सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष डीप प्रज्जवलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर अर्पित चड्ढा, वाइस चेयरमैन, I.T.S – The Education Group ने गौतम हज़ारी का स्वागत करते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 की यात्रा में सुरक्षित, विश्वसनीय और समावेशी डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि जिस गति से डिजिटल सेवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक और कनेक्टेड प्लेटफॉर्म्स का विस्तार हो रहा है, उसी अनुपात में साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल पहचान को भी मजबूत बनाना आवश्यक है।
मुख्य वक्ता गौतम हज़ारी ने अपने अत्यंत ज्ञानवर्धक संबोधन में बताया कि पारंपरिक पासवर्ड आधारित सुरक्षा प्रणालियां आज के डिजिटल युग में अनेक चुनौतियों का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि फिशिंग, पासवर्ड चोरी, क्रेडेंशियल लीक और सोशल इंजीनियरिंग जैसे जोखिमों ने अधिक सुरक्षित एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल प्रमाणीकरण प्रणालियों की आवश्यकता को बढ़ा दिया है। उन्होंने Passwordless Authentication, Digital Identity, Mobile Network Intelligence, Network APIs तथा आधुनिक Authentication Frameworks की भूमिका को सरल एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
श्री हज़ारी ने विशेष रूप से बताया कि भविष्य की डिजिटल दुनिया में SIM-based authentication, device intelligence, biometrics, network APIs तथा verified digital identity जैसे माध्यम अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने अपने द्वारा विकसित SAFr – Digital Identity & Network API Platform के संदर्भ में भी बताया कि किस प्रकार मोबाइल नेटवर्क इंटेलिजेंस का उपयोग सुरक्षित, सहज और भरोसेमंद डिजिटल पहचान एवं प्रमाणीकरण के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम विकसित भारत के डिजिटल भविष्य की आधारशिला होगा।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे साइबर सुरक्षा और डिजिटल पहचान को केवल तकनीकी विषय के रूप में न देखें, बल्कि इसे व्यक्तिगत गोपनीयता, विश्वास, डिजिटल अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यापक विषय के रूप में समझें। उन्होंने युवाओं को निरंतर सीखने, वैश्विक तकनीकी परिवर्तनों को समझने और नवाचार के माध्यम से वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. सुनील पाण्डेय, निदेशक, आई.टी.एस., मोहन नगर, गाजियाबाद ने अपने उद्घाटन उद्बोधन में कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम, नवाचार-प्रधान और डिजिटल रूप से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प है। उन्होंने कहा कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के इस युग में पासवर्ड-आधारित प्रणालियों की सीमाओं को समझना और अधिक सुरक्षित, सहज तथा भरोसेमंद प्रमाणीकरण व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से साइबर सुरक्षा, डिजिटल आइडेंटिटी, एआई, नेटवर्किंग और उभरती प्रौद्योगिकियों में दक्षता विकसित कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
सत्र के पश्चात एक अत्यंत रोचक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने Passwordless Technology, साइबर सुरक्षा, डिजिटल पहचान, मोबाइल नेटवर्क सिक्योरिटी, बायोमेट्रिक्स, एआई आधारित सुरक्षा तथा भविष्य की Authentication Technologies से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। श्री गौतम हज़ारी ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए अपने वैश्विक उद्योग अनुभव एवं व्यावहारिक उदाहरण साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. पूजा धर ने मुख्य वक्ता गौतम हज़ारी, आई.टी.एस. प्रबंधन, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सत्र विद्यार्थियों को वैश्विक तकनीकी परिवर्तनों को समझने तथा भविष्य की चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सत्र में MBA, MCA एवं I.T.S UG Campus के विद्यार्थियों के साथ विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों ने भी सहभागिता की।

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