गाजियाबाद। वर्ष 2017 में खोड़ा कॉलोनी निवासी गज्जी भाटी की हत्या के मामले में साहिबाबाद के पूर्व विधायक अमरपाल शर्मा को नामजद किया गया था। अमरपाल शर्मा पर हत्या का आरोप लगाकर विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था। जिला पुलिस प्रशासन द्वारा गुंडा एक्ट सहित दर्जनों फर्जी मुकदमे दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। लगभग 10 माह जेल में रहने के उपरांत उच्च न्यायालय इलाहाबाद (प्रयागराज) द्वारा उन्हें जमानत प्रदान की गई थी। जमानत मिलने के बाद से यह मुकदमा गाजियाबाद की एमपी/एमएलए अदालत में विचाराधीन था।
लगभग 10 वर्षों तक चले इस लंबे न्यायिक संघर्ष के बाद माननीय न्यायालय में उनकी संलिप्तता का कोई भी सबूत साबित नहीं हो पाया।
12 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को एमपी/एमएलए न्यायालय, जिला न्यायालय गाजियाबाद ने उन्हें इस हत्याकांड के आरोप से बरी कर दिया। फैसले के अगले दिन यानी मंगलवार को पूर्व विधायक अमरपाल शर्मा ने प्रेस कान्फें्रस कर कहा कि यह फैसला सत्य और न्याय की जीत है। यह साबित करता है कि राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता और बदले की भावना से लगाए गए फर्जी आरोप न्यायालय में नहीं टिक सके। पंडित अमरपाल शर्मा ने कहा कि यह एक बहुत गहरी राजनैतिक साजिश थी, यह फर्जी मुकदमा मेरी राजनैतिक और सामाजिक हत्या के लिए करवाया गया था । उन्होंने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति की हत्या हुई, उसके परिवार का दु:ख को मैं समझता हूं, लेकिन मेरे 10 साल का हिसाब कौन देगा । बता दें कि पंडित अमरपाल शर्मा पर हत्या के इस केस से पहले कोई केस नहीं था, लेकिन इस एफआईआर के बाद उन पर 14-15 ओर मुकदमे दायर किए गए, जिसमें गैंगस्टर, रासुका आदि थे । पंडित अमरपाल शर्मा ने कहा कि मेरा आखिर ऐसा कौन सा आपराधिक इतिहास था कि मुझे जेल में एकांतवास की कोठरी में रखा?
उन्होंने कहा कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं । मेरे मुश्किल वक्त में खड़े हर व्यक्ति का वे धन्यवाद करते हैं और न्यायालय का भी धन्यवाद करते हैं कि अदालत ने एक बार फिर सत्य को स्थापित किया ।

