किसी हॉस्पिटल की तरक्की का असली पैमाना यह है कि उसका लोगों की सेहत पर क्या असर पड़ता है: डॉ. उपासना अरोड़ायशोदा मेडिसिटी ने पूरे किए एक साल, इस एक साल में एडवांस्ड कैंसर देखभाल से लेकर जटिल ट्रांसप्लांट्स और सार्वजानिक स्वास्थ्य पहलों पर रहा जोर1,200 से ज्यादा बेड्स की क्षमता और एडवांस्ड चिकित्सा सुविधाओं के साथ यशोदा मेडिसिटी अपनी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का विस्तार करने की योजना बना रही है।
गाज़ियाबाद: सरकारी हॉस्पिटल में तकनीक-आधारित क्रिटिकल केयर सपोर्ट पहुँचाने से लेकर थैलेसीमिया के मरीजों के लिए विशेष सेवाएँ शुरू करने और आपातकालीन प्रतिक्रिया को मजबूत करने तक, यशोदा मेडिसिटी ने अपना पहला साल चिकित्सीय क्षमताएँ विकसित करने और विशेष स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को बेहतर बनाने की दिशा में काम करते हुए पूरा किया है। 26 अक्टूबर 2025 को भारत की माननीया राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा उद्घाटन किए गए इस हॉस्पिटल ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक की उपस्थिति में काम करना शुरू किया। यशोदा मेडिसिटी, स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के 35 वर्षों से अधिक के अनुभव और विरासत को आगे बढ़ा रही है। पहले साल में हॉस्पिटल ने आधुनिक इलाज, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग और इमरजेंसी तैयारियों से जुड़े कई कदम उठाए हैं।
इस दिशा में फरवरी 2026 में एक महत्वपूर्ण पहल की गई, जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने हॉस्पिटल के AI-एनेबल्ड E-ICU कमांड सेंटर का उद्घाटन किया। MMG जिला अस्पताल के सहयोग से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में तकनीक की मदद से गंभीर मरीजों की देखभाल की सुविधाओं को बेहतर बनाना और इस तरह की सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाना है। सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग और विशेषज्ञों की देखरेख से क्लीनिकल टीमों को गंभीर रूप से बीमार मरीजों पर नज़र रखने और उनकी स्थिति में होने वाले बदलावों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी। इस तरह यह हॉस्पिटल की क्रिटिकल केयर विशेषज्ञता और सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की देखभाल के बीच एक कड़ी का काम करेगा।
विशेष स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को बेहतर बनाने की दिशा में मई 2026 में एक समर्पित थैलेसीमिया केयर सेंटर की स्थापना की गई। यह सेंटर इस आनुवंशिक रक्त विकार से पीड़ित लोगों को एक ही जगह पर कई तरह की देखभाल सुविधाएँ उपलब्ध कराता है। इनमें विशेषज्ञों से परामर्श, खून चढ़ाना (ब्लड ट्रांसफ्यूजन), आयरन केलेशन थेरेपी, जेनेटिक काउंसलिंग और बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए मूल्यांकन शामिल हैं। इसके अलावा, बीमारी की शुरुआती पहचान और प्रजनन से जुड़े सही फैसले लेने में मदद के लिए यहाँ कैरियर स्क्रीनिंग, प्रसव-पूर्व जाँच (एंटीनेटल टेस्टिंग) और काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।
अपने पहले साल में यशोदा मेडिसिटी में 1,20,000 से अधिक मरीजों को भर्ती कर इलाज दिया गया और ओपीडी में परामर्श दिया गया। इस दौरान लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट सहित 4,235 से अधिक सर्जरी की गईं और 3,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मरीजों का इलाज किया गया। यशोदा इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर में भी 8,000 से अधिक मरीजों का इलाज हुआ। ये आँकड़े अस्पताल में विशेष चिकित्सा सेवाओं के बढ़ते दायरे को दर्शाते हैं।
यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, डॉ. पी. एन. अरोड़ा ने कहा, “यशोदा मेडिसिटी का पहला साल एडवांस्ड और व्यापक स्वास्थ्य सेवा के लिए एक मजबूत नींव रखने का रहा है। इसमें शुरुआत से ही चिकित्सीय क्षमताएं, मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेशलाइज्ड एक्सपर्टीज मौजूद रही है। अब जब हम अपने दूसरे साल में प्रवेश कर रहे हैं, तो हमारा ध्यान इसी नींव को और मजबूत करने, एडवांस्ड इलाज की उपलब्धता बढ़ाने, अपनी स्पेशलाइज्ड सेवाओं को और विकसित करने और यह सुनिश्चित करने पर है कि ज्यादा से ज्यादा मरीज अपने घर के करीब ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा का लाभ उठा सकें।”
इन सेवाओं को विकसित करने के साथ-साथ, हॉस्पिटल ने न्यूरोसाइंसेज, अंग प्रत्यारोपण, ऑन्कोलॉजी, कार्डियक साइंसेज और क्रिटिकल केयर सहित विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं में जटिल बीमारियों के इलाज की अपनी क्षमताओं को और मजबूत किया है। इसका मल्टीडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण विशेषज्ञों की विशेषज्ञता, एडवांस्ड सर्जिकल प्रक्रियाओं और सटीक कैंसर उपचार को एक साथ लाता है, ताकि मरीजों की विभिन्न जटिल चिकित्सा जरूरतों को पूरा किया जा सके। हॉस्पिटल को NABH मान्यता भी प्राप्त हुई है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर इसके विशेष ध्यान को दर्शाती है।
हॉस्पिटल के अंदर दी जाने वाली देखभाल के अलावा यशोदा मेडिसिटी ने हॉस्पिटल के बाहर के माहौल में भी लोगों की मेडिकल इमरजेंसी के प्रति प्रतिक्रिया देने की क्षमता को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया है। सितंबर 2026 में ‘वर्ल्ड हार्ट डे’ के मौके पर उन्होंने ‘रेप्प से रेस्क्यू तक- ट्रेन हार्ड, रिस्पॉन्ड फास्टर’ (Rep Se Rescue Tak- Train Hard. Respond Faster) नाम की एक पहल शुरू की। इस पहल का उद्देश्य दिल्ली-NCR के जिम और फिटनेस सेंटरों में कार्डियक इमरजेंसी से निपटने की तैयारियों को मजबूत करना है।
इस अभियान ने हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और वर्कआउट के लिए सुरक्षित माहौल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्डियोलॉजिस्ट, इमरजेंसी मेडिसिन विशेषज्ञों, फिटनेस प्रोफेशनल्स और फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स को एक साथ जोड़ा। ‘यशोदा सर्टिफाइड जिम एंड ट्रेनर इनिशिएटिव’ के तहत 70 से ज्यादा फिटनेस प्रोफेशनल्स ने कार्डियक अरेस्ट की पहचान करने, इमरजेंसी मेडिकल सपोर्ट बुलाने और कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) शुरू करने का ट्रेनिंग पूरा किया। लाइव परफॉर्मेंस और व्यावहारिक सिमुलेशन के जरिए प्रतिभागियों ने यह अभ्यास किया कि प्रोफेशनल मेडिकल मदद आने तक उन्हें किस तरह से कदम उठाने चाहिए।
यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. उपासना अरोड़ा ने कहा, “किसी हॉस्पिटल की तरक्की का असली पैमाना यह है कि उसका लोगों की सेहत पर क्या असर पड़ता है। स्पेशलाइज्ड इलाज की उपलब्धता को बेहतर बनाकर, पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम को मजबूत करके और शुरुआती स्तर पर ही इलाज में मदद देकर हमारा लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों को दूर करना है। हमारा पूरा ध्यान मरीजों की जरूरतों को प्राथमिकता देने, हेल्थकेयर के क्षेत्र में मजबूत साझेदारी बनाने और यह सुनिश्चित करने पर है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को उनके घर के पास ही समय पर और अच्छी गुणवत्ता वाला इलाज मिल सके।”
अक्टूबर 2026 में हॉस्पिटल ने आपातकालीन प्रतिक्रिया (इमरजेंसी रिस्पॉन्स) पर अपनी इस पहल को ट्रॉमा मैनेजमेंट तक बढ़ाया। ‘इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रॉमा एंड एक्यूट केयर’ (ISTAC) के सहयोग से हॉस्पिटल ने लगभग 100 प्रतिभागियों को ‘ट्रॉमा फर्स्ट रिस्पॉन्स’ की ट्रेनिंग दी। इन प्रतिभागियों में पुलिसकर्मी, फ्रंटलाइन रिस्पॉन्डर और कम्युनिटी के सदस्य शामिल थे। इस कार्यक्रम में घटनास्थल की सुरक्षा, एयरवे मैनेजमेंट, खून बहने पर नियंत्रण, सुरक्षित मरीज को हॉस्पिटल तक पहुँचाने और इमरजेंसी बचाव जैसे विषय शामिल थे। इससे प्रतिभागियों को ऐसी व्यावहारिक स्किल्स मिली, जिनकी मदद से वे मरीजों के हॉस्पिटल पहुँचने से पहले के नाजुक समय में जरूरी कदम उठा सकें।
ये पहलें एक व्यापक क्लीनिकल फ्रेमवर्क का हिस्सा हैं, जिसे विशेष सुविधाओं से लैस बुनियादी ढांचे और विभिन्न चिकित्सा सेवाओं का सहयोग प्राप्त है। यशोदा मेडिसिटी की प्लांड कैपेसिटी (नियोजित क्षमता) 1,200 से ज्यादा बेड्स, 252 से ज्यादा मॉड्यूलर ICU बेड्स, 22 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटरों और 10 से ज्यादा एंडोस्कोपी सुइट्स की है। इसके क्लीनिकल पोर्टफोलियो में 65 से ज्यादा सुपर-स्पेशिलिटी और 12 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शामिल हैं। इनमे रोबोटिक सर्जरी, कार्डियोलॉजी, स्पेशलाइज्ड डायग्नोस्टिक और एडवांस्ड कैंसर इलाज शामिल हैं। इस पोर्टफोलियो के अंतर्गत कैंसर देखभाल को एलेक्ता यूनिटी MR-Linac, हाइपरसाइट और IDENTIFY के साथ ETHOS थेरेपी, HyperArc और ExacTrac डायनेमिक के साथ EDGE और BRAVOS जैसी तकनीकों द्वारा समर्थित किया जाता है। ये तकनीकें कैंसर के इलाज में रेडिएशन का सटीक इस्तेमाल करने, मरीज की जरूरत के अनुसार इलाज में बदलाव करने और रेडियोसर्जरी में मदद करती हैं। इससे कैंसर के मरीजों को इलाज के अधिक विकल्प मिलते हैं।
जैसे-जैसे यशोदा मेडिसिटी अपने दूसरे साल में प्रवेश कर रहा है, इसका मुख्य फोकस अब तक स्थापित क्लीनिकल क्षमताओं को और बेहतर बनाने, स्पेशलाइज्ड सेवाओं का विकास करने और एडवांस्ड उपचार तक पहुंच को मजबूत करने पर होगा। अगले चरण में हॉस्पिटल अपने बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा साझेदारियों और इमरजेंसी केयर तैयारियों का लाभ गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश और पूरे NCR के मरीजों तक पहुंचाने का प्रयास करेगा। इसके साथ ही भारत में स्पेशलाइज्ड मेडिकल देखभाल की तलाश कर रहे अंतररष्ट्रीय मरीजों को भी सहायता देना जारी रखेगा।





