आज का भारत अवसरों का भारत है: डा. अजय आलोक

  • आई.टी.एस. में ‘संवाद’ श्रृंखला के अंतर्गत ‘विकसित भारत 2047’ विषय पर डॉ. अजय आलोक का प्रेरक संबोधन
  • देश की युवा पीढ़ी की ऊर्जा, प्रतिभा और उद्यमशीलता इस संकल्प को साकार करने की सबसे बड़ी शक्ति है: अर्पित चड्ढा
  • विद्यार्थी जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें: डा. सुनील पांडेय

गाजियाबाद। आई.टी.एस., मोहन नगर, गाजियाबाद में प्रतिष्ठित ‘संवाद’ व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत ‘विकसित भारत 2047’ विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. अजय आलोक, राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी रहे। इस अवसर पर आई.टी.एस.द एजुकेशन ग्रुप के वाइस चेयरमैन अर्पित चड्ढा, निदेशक डॉ. सुनील कुमार पाण्डेय, संकाय सदस्य एवं एमबीए, एमसीए व आई.टी.एस. यूजी कैंपस के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। इस अवसर पर अर्पित चड्ढा ने डॉ. अजय आलोक का स्वागत करते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, नवाचारी, तकनीकी रूप से सक्षम और सामाजिक रूप से सशक्त भारत के निर्माण का राष्ट्रीय संकल्प है। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी की ऊर्जा, प्रतिभा और उद्यमशीलता इस संकल्प को साकार करने की सबसे बड़ी शक्ति है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ नवाचार, कौशल विकास, राष्ट्रभावना और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।
डॉ. सुनील कुमार पाण्डेय ने अपने प्रारंभिक उद्बोधन में कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य भारत को विश्व की अग्रणी ज्ञान, तकनीक, नवाचार और आर्थिक शक्तियों में स्थापित करने की दिशा में एक व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, अनुसंधान, उद्यमिता एवं नवाचार भारत की विकास यात्रा के प्रमुख आधार होंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं को केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित न रखें, बल्कि समस्या-समाधानकर्ता, नवप्रवर्तक, उद्यमी और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।
मुख्य वक्ता डॉ. अजय आलोक ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा जब देश का प्रत्येक नागरिक राष्ट्र के विकास को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करेगा। उन्होंने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, डिजिटल परिवर्तन, स्टार्टअप इकोसिस्टम, बुनियादी ढांचे के विस्तार, आत्मनिर्भरता तथा वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज का भारत अवसरों का भारत है और युवाओं के सामने अपनी प्रतिभा एवं क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने के अभूतपूर्व अवसर उपलब्ध हैं।
डॉ. अजय आलोक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं को बड़े सपने देखने के साथ-साथ अनुशासन, ज्ञान, कौशल, परिश्रम और सकारात्मक सोच को अपने जीवन का आधार बनाना होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी और इसके लिए नई पीढ़ी को तकनीकी दक्षता के साथ भारतीय मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता एवं राष्ट्रहित की भावना को भी मजबूत करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से नवाचार, उद्यमिता एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने तथा देश के विकास में सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया।
सत्र के दौरान डॉ. अजय आलोक ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए विभिन्न राष्ट्रीय, सामाजिक, आर्थिक एवं युवा-केंद्रित विषयों पर उनके प्रश्नों के उत्तर दिए। विद्यार्थियों ने विकसित भारत, रोजगार, तकनीकी परिवर्तन, उद्यमिता, शिक्षा तथा देश के भविष्य से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने सहज एवं विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। प्रश्नोत्तर सत्र ने कार्यक्रम को अत्यंत संवादात्मक एवं ज्ञानवर्धक बनाया।
इसके पूर्व कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. मनोज कुमार झा ने संवाद श्रृंखला एवं आज के विशेष सत्र की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अतिथि वक्ता का संक्षिप्त परिचय दिया तथा कार्यक्रम के उद्देश्य से उपस्थित विद्यार्थियों को अवगत कराया।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. आस्था शुक्ला ने मुख्य वक्ता डॉ. अजय आलोक, आई.टी.एस. प्रबंधन, सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के संवाद विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण के प्रति अधिक जागरूक, उत्तरदायी एवं प्रेरित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *