
- डिपार्टमेंट आफ साइंस एंड टैक्नोलॉजी, भारत सरकार द्वारा किया गया प्रायोजित
- विभिन्न संस्थानों से कुल 27 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक लिया भाग
गाजियाबाद। टैक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर- केआईईटी गाजियाबाद द्वारा तुलास इंस्टीट्यूट, देहरादून में 13 से 25 अप्रैल 2026 तक दो सप्ताह का फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आन एंटरप्रेन्योरशिप सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम डिपार्टमेंट आफ साइंस एंड टैक्नोलॉजी, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित था। इस कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों से कुल 27 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन डा. रविंदर गौर साइंटिस्ट, इ, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डिवीजन, डीएसटी डॉ. शैलेन्द्र तिवारी (निदेशक, तुलाज इंस्टीट्यूट) एवं सौरव कुमार (महाप्रबंधक, टी बी आई – काईट) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में अतिथियों ने शिक्षकों की भूमिका को उद्यमिता के संवाहक के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि आज के समय में शिक्षण संस्थानों को केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित न रहकर नवाचार एवं स्टार्टअप संस्कृति को भी बढ़ावा देना आवश्यक है।
यह 14 दिवसीय कार्यक्रम पूर्णत: व्यावहारिक एवं सहभागितापूर्ण गतिविधियों पर आधारित रहा। प्रारंभिक दिनों में डॉ. रीता सेन गुप्ता द्वारा माइक्रो लैब एवं अचीवमेंट मोटिवेशन से संबंधित सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्रतिभागियों ने मनोवैज्ञानिक टेस्ट के माध्यम से अपनी आंतरिक प्रेरणाओं को समझा तथा समूह गतिविधियों के माध्यम से व्यवहारिक सीख प्राप्त की। टॉवर बिल्डिंग एवं बोट मेकिंग जैसे अभ्यासों के माध्यम से टीमवर्क, योजना निर्माण एवं लक्ष्य प्राप्ति की रणनीतियों को सुदृढ़ किया गया। कार्यक्रम के मध्य चरण में डा. रीतम दत्ता द्वारा डिजाइन थिंकिंग पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें प्रतिभागियों को समस्या समाधान की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया गया। इसके साथ ही श्री एस. बी. बहुगुणा द्वारा मार्केट सर्वे के उपकरण एवं तकनीकों तथा स्टार्टअप एवं एमएसएमई के लिए प्रभावी मार्केटिंग रणनीतियों पर सत्र लिए गए।
व्यावसायिक दृष्टिकोण को मजबूत करने हेतु विजय वीर सिंह द्वारा बिजनेस प्लान तैयार करने की प्रक्रिया समझाई गई, जबकि प्रियांश गुप्ता (सीए) ने कानूनी औपचारिकताओं, जीएसटी एवं कर प्रक्रियाओं पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। डॉ. एस. पी. मिश्रा द्वारा हूँ एम आई, जोखिम लेने की प्रवृत्ति एवं उद्यमशीलता दक्षताओं पर आयोजित सत्रों ने प्रतिभागियों को आत्मविश्लेषण एवं आत्मविकास के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को औद्योगिक भ्रमण के माध्यम से उद्योग जगत की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला, जिससे उनके व्यावहारिक ज्ञान में वृद्धि हुई।
बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) एवं तकनीकी हस्तांतरण के क्षेत्र में अनुज रतौरी (आईपी विशेषज्ञ) द्वारा पेटेंट, कॉपीराइट एवं तकनीकी ट्रांसफर की प्रक्रियाओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त विभिन्न सरकारी योजनाओं, बैंकिंग प्रक्रियाओं, जिला उद्योग केंद्र एवं पीएमईजीपी जैसी योजनाओं के माध्यम से उद्यम स्थापना के अवसरों पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम के अंतिम चरण में मोहित नागपाल द्वारा बिजनेस कैनवास मॉडल पर कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने व्यावसायिक विचारों को संरचित रूप में प्रस्तुत करना सीखा। सरिश्मा डांगी ने स्टार्टअप पिचिंग, निवेशकों की अपेक्षाओं एवं फंडिंग प्रक्रिया पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। वहीं सौरव कुमार द्वारा छात्रों के प्रोजेक्ट को स्टार्टअप में परिवर्तित करने एवं इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने की प्रक्रिया पर उपयोगी जानकारी साझा की गई।
कार्यक्रम का समापन समारोह 25 अप्रैल 2026 को आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. शैलेन्द्र तिवारी (निदेशक, तुलाज इंस्टीट्यूट) एवं डॉ. निशांत सक्सेना (अतिरिक्त निदेशक, देहरादून) उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने प्रतिभागियों को अर्जित ज्ञान को अपने-अपने संस्थानों में लागू करने तथा छात्रों को उद्यमिता के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए तथा उनके सक्रिय सहभागिता की सराहना की गई। यह कार्यक्रम अपने उद्देश्यों की पूर्ति करते हुए शिक्षकों में उद्यमशीलता, नवाचार एवं स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने में सफल रहा और भविष्य में ऐसे और कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया गया।

