सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल में गूंजी विकसित भारत की गूंज

  • भाषण, कला प्रतियोगिता व कला प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया
  • 'खुद को बदलेंगे, देश को बदलेंगे': अपनी प्रतिभा से बच्चों ने विकसित भारत की अवधारणा को दिया साकार रूप

गाजियाबाद। सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल में ‘विकसित भारत-2047‘ के संकल्प को केंद्र में रखते हुए भाषण, कला प्रतियोगिता व कला प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता और विचारों के माध्यम से विकसित भारत की अवधारणा को जीवंत रूप प्रदान किया। बच्चों की प्रस्तुतियां और कला कृतियों ने उपस्थित अतिथियों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भाजपा कवि नगर मंडल की महामंत्री डॉ. रिता देओल ने कहा कि सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल के विद्यार्थियों की जागरूकता और सजगता इस बात का प्रमाण है कि यह बच्चे भविष्य के भारत के प्रति सकारात्मक और प्रतिबद्ध नजरिया रखते हैं। डॉ. देओल ने विद्यार्थियों की भाषा, प्रयास एवं कलाकृतियों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों की प्रतिभा इस बात का सुबूत हैं कि यह बच्चे शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और सामयिक सरोकारों के प्रति भी जागरूक हैं।
नेहरू नगर स्थित सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल की शाखा का औचक निरीक्षण करने पहुंची डॉ. देओल ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना केवल सरकार या किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नहीं अपितु समाज के प्रत्येक व्यक्ति के सकारात्मक योगदान से संभव है। उन्होंने बच्चों का आह्वान किया कि वह दूसरों से स्पर्धा करने के बजाए स्वयं से स्पर्धा करें। इसके अलावा अपने कल को आज से बेहतर करने का निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि खुद में परिवर्तन, स्वयं से स्पर्धा और आज से बेहतर कल ही तरक्की का महामंत्र है। बच्चों की एक छोटी सी सकारात्मक पहल भविष्य के सशक्त व विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बिना पूर्व सूचना के विद्यार्थियों ने अचानक प्रदान किए गए अवसर में अपने बेबाक उद्बोधन, चित्रों एवं कलाकृतियों के माध्यम से वर्ष 2047 के विकसित भारत की कल्पना को साकार कर दिखाया। उनमें से किसी ने आधुनिक भारत की तस्वीर उकेरी तो किसी ने शिक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य , आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े अपने विचारों को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। डॉ. देओल ने स्कूल की संस्थापक व निदेशक डॉ. माला कपूर व शैक्षिक विभाग की सराहना करते हुए कहा कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम न होने के बावजूद जिस आत्मविश्वास के साथ बच्चों ने अचानक दिए गए लक्ष्य को हासिल किया वह उनकी विद्वता, जागरूकता व विषय के प्रति गंभीर आत्मबोध का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए समय -समय पर ऐसा मंच उपलब्ध किया जाना सकारात्मक पहल है। ऐसे आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच और अभिव्यक्त करने की क्षमता विकसित करने के साथ राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।

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