प्रत्येक बच्चे को सुपोषित बनाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता: शशि वार्ष्णेय

  • कुपोषण से सुपोषण तक की प्रेरक यात्रा: सिया की सफलता की कहानी
  • आंगनवाड़ी के प्रयासों से बदली सिया की जिंदगी, कुपोषण से सुपोषण तक पहुंची बालिका
  • समय पर देखभाल और पोषण से मिली नई उड़ान, सिया ने जीती कुपोषण की जंग

गाज़ियाबाद। जनपद गाज़ियाबाद के मुरादनगर परियोजना अंतर्गत असालतनगर आंगनवाड़ी केंद्र से जुड़ी नन्ही बालिका सिया ने कुपोषण से सुपोषण तक की प्रेरणादायक यात्रा तय की है। यह सफलता कहानी दर्शाती है कि समय पर पहचान, नियमित निगरानी, परिवार की सहभागिता तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्पित प्रयासों से बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
जीवन के प्रारंभिक महीनों में सिया गंभीर तीव्र कुपोषण से ग्रसित पाई गई थी। छह माह की आयु तक उसका वजन अत्यधिक कम था तथा उसकी वृद्धि सामान्य बच्चों की तुलना में धीमी थी। इसके कारण वह बार-बार बीमार पड़ती थी और उसके समुचित विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। परिवार उसकी देखभाल तो कर रहा था, लेकिन संतुलित आहार, पूर्ण स्तनपान, समय पर पूरक आहार की शुरुआत, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और टीकाकरण के प्रति पर्याप्त जागरूकता का अभाव था।
परिवर्तन की शुरुआत तब हुई जब असालतनगर आंगनवाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता श्रीमती रीना ने वजन दिवस एवं ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण दिवस के दौरान सिया की पहचान की। उन्होंने सिया के माता-पिता को आवश्यक परामर्श प्रदान किया तथा नियमित रूप से आंगनवाड़ी केंद्र पर आकर स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
सिया के लिए समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन के अंतर्गत आयु के अनुरूप पोषण अनुपूरक उपलब्ध कराए गए तथा साप्ताहिक गृह भ्रमण के माध्यम से उसकी वृद्धि की नियमित निगरानी की गई। उसे समय पर सभी आवश्यक टीके लगाए गए, जिससे वह विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रह सकी। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण दिवस के नियमित सत्रों में स्वास्थ्य परीक्षण, वृद्धि निगरानी तथा माता को शिशु एवं बाल आहार संबंधी परामर्श प्रदान किया गया। साथ ही परिवार को घर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों से संतुलित एवं विविध आहार देने के लिए लगातार प्रेरित किया गया।
निरंतर देखभाल और निगरानी के परिणामस्वरूप सिया की स्थिति गंभीर तीव्र कुपोषण से सुधरकर मध्यम तीव्र कुपोषण की श्रेणी में पहुंची। चूंकि वह बिना चिकित्सकीय जटिलताओं वाली श्रेणी में थी, इसलिए उसका उपचार घर पर ही किया गया। नियमित परामर्श, परिवार के सहयोग तथा स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं के सतत लाभ से उसकी वृद्धि धीरे-धीरे सामान्य हो गई।
आज सिया एक स्वस्थ, सक्रिय और प्रसन्नचित्त बालिका है। उसकी यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि समुदाय आधारित प्रयास, समय पर हस्तक्षेप और आंगनवाड़ी सेवाओं की प्रभावी भूमिका बच्चों को कुपोषण से सुपोषण की ओर ले जाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी शशि वार्ष्णेय ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियां नियमानुसार घर-घर जाकर बच्चों की जांच करती हैं तथा आंगनवाड़ी केंद्रों पर भी नियमित रूप से स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी गतिविधियां संचालित करती हैं। वे संबंधित परिवारों से निरंतर संपर्क बनाए रखकर बच्चों को कुपोषण से सुपोषण की ओर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा एवं संचालित योजनाओं के अनुरूप प्रत्येक बच्चे को सुपोषित बनाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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