

गाजियाबाद। आई.टी.एस. डेंटल काय ॅलेज, गाजियाबाद के प्रोस्थोडोंटिक्स एंड क्राउन एंड ब्रिज विभाग द्वारा एक दिवसीय सी.डी.ई. एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय आक्लूजन अनलोक्ड: द की टू क्लीनिक सक्सेस था। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न डेंटल कॉलेजों के 200 से अधिक बी.डी.एस. छात्र एवं एम.डी.एस. के विद्यार्थियों के साथ-साथ सभी दंत विभागों के दंत चिकित्सकों ने सहभागिता की। यह कार्यक्रम आई.टी.एस.- द एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन, डॉ. आर.पी. चड्ढा तथा वाईस चेयरमैन अर्पित चड्ढा के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. रघुवर दयाल सिंह, प्रोफेसर, प्रोस्थोडोंटिक्स विभाग, किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय, लखनऊ रहे। डॉ.रघुवर को प्रोस्थोडोंटिक्स के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक के शिक्षण एवं क्लीनिकल अनुभव प्राप्त है। इस अवसर पर संस्थान के डायरेक्टर-प्रिंसिपल, डॉ देवी चरण शेट्टी के साथ-साथ संस्थान के सभी डीन्स, दंत विभागों के एच.ओ.डी. एवं दंत चिकित्सक भी उपस्थित रहें। अपने व्याख्यान में डॉ. रघुवर ने दंत आॅक्लूजन के मूलभूत सिद्धांतों तथा रेस्टोरेटिव डेंटिस्ट्री, प्रोस्थोडोंटिक्स, इम्प्लांट डेंटिस्ट्री एवं फुल माउथ रिहैबिलिटेशन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने आॅक्लूजल कॉन्टैक्ट्स एवं मैंडीबुलर मूवमेंट्स के वैज्ञानिक विश्लेषण के माध्यम से सामान्य एवं विकृत आॅक्लूजल स्थितियों की पहचान, पैराफंक्शनल आदतों के साक्ष्य-आधारित निदान एवं प्रबंधन तथा दैनिक क्लीनिकल प्रैक्टिस में वैज्ञानिक आॅक्लूजल सिद्धांतों के समुचित उपयोग की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। कार्यशाला का मुख्य आकर्षण टी-स्कैन कम्प्यूटरीकृत आॅक्लूजल विश्लेषण प्रणाली का लाइव प्रदर्शन रहा। डॉ सिंह ने इस अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से डायनेमिक आॅक्लूजल कॉन्टैक्ट्स, बाइट फोर्स डिस्ट्रीब्यूशन, आॅक्लूजल टाइमिंग तथा मैंडीबुलर मूवमेंट्स का सटीक विश्लेषण प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों ने व्यावहारिक रूप से यह समझा कि इस तकनीक द्वारा आॅक्लूजल इंटरफेरेंस एवं बल के संतुलन की सटीक पहचान कर बेहतर निदान, वैज्ञानिक आॅक्लूजल समायोजन तथा प्रभावी उपचार योजना कैसे तैयार की जा सकती है। कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तरी सत्र में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञ से विभिन्न विषयों पर चर्चा की तथा अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। सभी प्रतिभागियों ने कार्यक्रमों की वैज्ञानिक गुणवत्ता, व्यावहारिक प्रस्तुति एवं डिजिटल आॅक्लूजल विश्लेषण से संबंधित ज्ञानवर्धक जानकारी की सराहना की। इस कार्यशाला ने प्रतिभागियों को आधुनिक आॅक्लूजल विश्लेषण तकनीकों एवं दीर्घकालिक, कार्यात्मक तथा सफल उपचार परिणामों प्राप्त करने में उनके प्रभावी उपयोग के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. रघुवर दयाल सिंह ने इस कार्यशाला के उत्कृष्ट एवं सफल आयोजन हेतु संस्थान की सराहना की। इस कार्यक्रम के माध्यम से सभी प्रतिभागियों को सर्वश्रेष्ठ क्लीनिकल ज्ञानवर्धक मंच उपलब्ध कराने के लिये आई.टी.एस. – द एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन डॉ. आर.पी. चड्ढा तथा वाईस चेयरमैन अर्पित चड्ढा के प्रति आभार व्यक्त किया।

