नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच यूपी के चर्चित एनकाउंटर स्पेशलिस्ट आईपीएस अजय पाल शर्मा के सख्त तेवर सामने आए हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा आॅब्जर्वर बनाए गए शर्मा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर जनता को डराया या धमकाया गया, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी और बाद में पछताना पड़ेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसारटीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान पर वोटरों को धमकाने की शिकायत मिलते ही अजय पाल शर्मा खुद मौके पर पहुंचे। इस दौरान जहांगीर खान के परिवार के लोग भी मौके पर मौजूद रहे और बातचीत के दौरान माहौल कुछ देर के लिए गरमाया भी, लेकिन अधिकारियों ने स्थिति को संभालते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने का संदेश दिया। उनके नेतृत्व में एसएसबी, एफएसटी और क्यूआरटी टीम ने छापेमारी की और सख्ती दिखाई। इस दौरान जहांगीर खान को मिली वाई कैटेगरी सुरक्षा पर भी सवाल उठे। मौके पर निर्धारित संख्या से अधिक जवान तैनात पाए गए, जिस पर अजय पाल शर्मा ने स्थानीय एसपी को नोटिस जारी कर अतिरिक्त फोर्स तैनाती पर जवाब मांगा।
अजय पाल शर्मा 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी अधिकारियों में भी गिना जाता है। अपने करियर में वे 500 से अधिक एनकाउंटर कर चुके हैं, जिनमें कई अपराधी मारे गए और कई गिरफ्तार किए गए। जौनपुर में एसपी रहते हुए उन्होंने 22 महीने में 136 एनकाउंटर कर रिकॉर्ड बनाया था।
खास बात यह है कि एक ही परिवार में प्रशासनिक सेवा की दो बड़ी जिम्मेदारियां निभाई जा रही हैं। उनके छोटे भाई अमित पाल शर्मा भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी हैं। उन्होंने 2015 की यूपीएससी परीक्षा में 17वीं रैंक हासिल की थी और वे 2016 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी हैं। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के जिलाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
महाकुंभ 2024 से पहले उन्हें प्रयागराज में नोडल अधिकारी बनाया गया था, जहां उन्होंने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान में वे एडिशनल सीपी (लॉ एंड आॅर्डर) प्रयागराज के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वे गाजियाबाद, हाथरस, शामली, रामपुर और जौनपुर जैसे जिलों में एसपी/एसएसपी रह चुके हैं और पुलिस मुख्यालय व यूपी-112 में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल 2026 को होगा, जबकि चुनाव के नतीजे 4 जून 2026 को घोषित किए जाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद संदेश स्पष्ट है कि बंगाल चुनाव में कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा और डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

