स्कूलों के 100 गज के दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री गैर कानूनी: सीमा त्यागी

  • नियमों के उल्लंघन पर हो सख्त कार्यवाई
  • बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं

गाजियाबाद। शिक्षा के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाली इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा त्यागी ने बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े एक अत्यंत गंभीर विषय को उठाते हुए नियमों के विरुद्ध स्कूलों के आसपास नशे के पदार्थों की बढ़ती बिक्री पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जहां सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम ( कोटपा ) 2003 की धारा 6 के तहत, किसी भी शैक्षणिक संस्थान के 100 गज (लगभग 100 मीटर) के दायरे में पान, सिगरेट, गुटखा या कोई भी तंबाकू उत्पाद बेचना गैरकानूनी है। वही यूपी आबकारी विभाग के नियमों ( यूपी नंबर एंड लोकेशन आफ एक्साइज शॉप रूल्स,
1968) के तहत, स्कूलों, धार्मिक स्थलों, अस्पतालों और रिहायशी कॉलोनियों के पास शराब की दुकानें नहीं खोली जा सकतीं। यह न्यूनतम दूरी आम तौर पर 50 से 100 मीटर के बीच निर्धारित की गई है। इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय के दिशानिदेर्शों के अनुसार, स्कूल के मुख्य गेट और परिसर में ‘तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान’ का बोर्ड लगाना अनिवार्य है। साथ ही, स्कूल के आसपास 100 गज की दूरी को ‘पीली रेखा’ से चिह्नित कर उसे तंबाकू मुक्त क्षेत्र घोषित करने के निर्देश हैं।उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्कूलों-कॉलेजों के पास नशे की बिक्री रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने और जिला स्तरीय समितियों के माध्यम से निगरानी करने के निर्देश भी दिए हैं उसके बाद भी विद्यालयों के आस पास नशीले पदार्थों की बिक्री की जाती है जिसका संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन की तरफ से तत्काल सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए । हम सभी जानते है कि स्कूलों के निकट तंबाकू, सिगरेट, गुटखा व अन्य नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य, उनके उज्ज्वल भविष्य और नैतिक विकास के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। किशोर अवस्था में ऐसे प्रभाव बच्चों को गलत दिशा में ले जा रहे हैं, जो सभी माता पिता के लिए चिंता का विषय है। सीमा त्यागी ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए निम्नलिखित मांगें रखीं- स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में नशे के पदार्थों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध के नियमों का पालन सख्ती से सुनिश्चित कराया जाए। संबंधित क्षेत्रों में पुलिस एवं प्रशासन द्वारा नियमित निरीक्षण एवं विशेष अभियान चलाए जाएं। नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। स्कूलों, अभिभावकों एवं प्रशासन के संयुक्त प्रयास से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। बच्चों को नशे से बचाना केवल प्रशासन की ही नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं बरती गई, तो इसके दूरगामी और गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। में समस्त अभिभावकों, शिक्षकों एवं सामाजिक संगठनों से अपील करती हूं की कि वे इस गंभीर मुद्दे पर एकजुट होकर बच्चों के सुरक्षित, स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए आवाज उठाएं।

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